रांची: आर्थिक तंगी से जूझ रहे हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) के परिसरों में प्रबंधन की लापरवाही और उदासीनता का बड़ा मामला सामने आया है। एचईसी के अलग-अलग श्रेणियों के कुल 260 क्वार्टरों पर अवैध कब्जा कर लिया गया है। यदि ये आवास खाली कराकर किराए या लीज पर दिए जाते, तो एचईसी प्रबंधन को सालाना करीब 2.19 करोड़ रुपये का राजस्व मिल सकता था।

कंडम घोषित क्वार्टरों पर भी कब्जा
एचईसी के आवासीय परिसर में 260 अवैध कब्जों के अलावा 500 से अधिक ऐसे क्वार्टर भी हैं जिन्हें प्रबंधन द्वारा ‘कंडम’ घोषित किया जा चुका है और इन जर्जर क्वार्टरों पर भी अवैध कब्जा पाया गया है। इन जर्जर क्वार्टरों में कौन रह रहा है, इसकी जानकारी भी एचईसी प्रबंधन के पास नहीं है। यहां तक कि कुछ समय पहले राजधानी के एक बड़े व्यवसायी के पुत्र का अपहरण करके भी एचईसी के इसी तरह के एक क्वार्टर में रखा गया था, जो सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।
यूनियन नेताओं ने उठाए सवाल, हो रही अवैध वसूली
हटिया कामगार यूनियन के उपाध्यक्ष लालदेव सिंह ने आरोप लगाया है कि अवैध रूप से रहने वाले लोग ताला तोड़कर इन आवासों में रह रहे हैं और कुछ लोग इन क्वार्टरों में रहने के एवज में अवैध रूप से मासिक किराया भी वसूल रहे हैं। इसकी कोई भी जानकारी एचईसी प्रबंधन को नहीं होती है। समय पूरा होने के बावजूद क्वार्टरों का लाइसेंस रिन्यू नहीं हो रहा है और आवासीय परिसर में 10 वर्षों के लिए आवंटित दुकानों की लीज का भी नवीनीकरण नहीं किया जा रहा है।
एचईसी श्रमिक संघ के अध्यक्ष शनि सिंह ने बताया कि सीओटी (चीफ ऑफ टाउनशिप) को इन अवैध कब्जों की पूरी जानकारी है, इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है। प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न श्रेणियों के क्वार्टरों पर अवैध कब्जे से होने वाले संभावित वार्षिक नुकसान का विवरण भी जारी किया गया है।
सीडी टाइप (24 क्वार्टर): ₹28,80,000 वार्षिक
बी टाइप (181 क्वार्टर): ₹1,52,04,000 वार्षिक
ए टाइप (37 क्वार्टर): ₹22,20,000 वार्षिक
इ टाइप (04 क्वार्टर): ₹9,60,000 वार्षिक
एनएन टाइप (10 क्वार्टर): ₹4,80,000 वार्षिक
एटी टाइप (01 क्वार्टर): ₹48,000 वार्षिक
सी टाइप (02 क्वार्टर): ₹96,000 वार्षिक
डी टाइप (01 क्वार्टर): ₹48,000 वार्षिक


