खिलाड़ियों के लिए बने करोड़ों के फ्लैटों पर खेल प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों का अवैध कब्जा, जानें क्या है पूरा मामला

रांची के खेलगांव हाउसिंग कॉम्प्लेक्स के फ्लैटों पर अधिकारियों और कर्मचारियों के कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। जांच कमेटी गठित कर कार्रवाई की तैयारी है।

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रांची: खेल विभाग की व्यवस्था की पोल खोलती एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसके मुताबिक वर्ष 2011 में खेलगांव हाउसिंग कॉम्प्लेक्स का निर्माण राष्ट्रीय खेल के दौरान बाहर से आने वाले खिलाड़ियों को ठहराने के लिए किया गया था। लेकिन खेल समाप्त होने के बाद इस कॉम्प्लेक्स के फ्लैटों पर खिलाड़ियों के बजाय खेल प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वर्षों से अवैध कब्जा कर रखा है।

बिना किसी आधिकारिक आवंटन के ये लोग इन करोड़ों रुपये के फ्लैटों और डुप्लेक्स में मुफ्त रह रहे हैं। स्थिति यह है कि बाहर से आने वाले पदक विजेता और राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को ठहरने के लिए जगह नहीं मिलती, जिसके कारण उन्हें स्टेडियम के फर्श पर गद्दे बिछाकर रात गुजारनी पड़ती है।

खेल प्राधिकरण के कई बड़े अधिकारी, संविदा कर्मी और मुख्य प्रशिक्षक इन आवासों में जमे हुए हैं, यहां तक कि फ्लैट के बाहर उनके नाम की नेम प्लेट तक लगी हुई है। इन आवासों के बिजली मीटर भी संबंधित कर्मचारियों के नाम पर नहीं हैं, जिससे बिजली बिल और रखरखाव पर होने वाले खर्च का भुगतान किस मद से हो रहा है, इसका कोई स्पष्ट ब्योरा सामने नहीं आया है। इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेते हुए झारखंड खेल प्राधिकरण के निदेशक छवि रंजन ने जांच कमेटी गठित कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।