जरूरतमंद बच्चों की मदद के प्रयासों की सराहना
मुख्य सचिव ने विशेष बच्चों समेत अन्य बच्चों की प्रतिभा निखारने और उन्हें रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए जेसोवा की पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के आयोजन शिक्षा को बढ़ावा देने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में अहम भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि दिवाली मेला देश के विभिन्न हिस्सों से आए शिल्पकारों, कारीगरों और कलाकारों को अपनी कला दिखाने का अवसर देता है। इससे अलग-अलग क्षेत्रों की परंपराओं और संस्कृति को जानने के साथ सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलता है।
तीन जिलों के पुस्तकालयों को 15-15 लाख रुपये
जेसोवा ने शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से चाईबासा, देवघर और दुमका के पुस्तकालयों के लिए आर्थिक सहायता दी। प्रत्येक जिले को 15 लाख रुपये प्रदान किए गए। इस राशि से विद्यार्थियों को अध्ययन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा, मूक-बधिर और दृष्टिबाधित बच्चों को संगीत की शिक्षा देने के लिए श्रेयशी बनर्जी को 96 हजार रुपये की सहायता राशि दी गई। वहीं, बच्चों में कला और रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए आर्ट एंड क्राफ्ट के क्षेत्र में स्वास्तिका बनर्जी को भी 96 हजार रुपये प्रदान किए गए।
मेले में सरकारी योजनाओं की जानकारी और सांस्कृतिक कार्यक्रम
दिवाली मेले में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के स्टॉल के माध्यम से लोगों को सरकारी योजनाओं की जानकारी दी जा रही है। यहां योजनाओं से जुड़ी पत्र-पत्रिकाएं निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही एलईडी टीवी के जरिए सरकारी योजनाओं पर आधारित लघु फिल्में और डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जा रही हैं।
बारिश के बावजूद मेले में लोगों का उत्साह बना रहा। सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सितार और सरोद की जुगलबंदी, सुगम संगीत और नृत्य प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। कठपुतली शो भी आकर्षण का केंद्र रहा।
मेले के समापन की तारीख में बदलाव
JIASOWA की अध्यक्ष प्रीति कुमार के अनुसार, मौसम और बारिश की संभावना को देखते हुए तथा मेले में शामिल विक्रेताओं को आर्थिक नुकसान से बचाने के उद्देश्य से समापन की तारीख में बदलाव किया गया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जेसोवा दिवाली मेला 2026 का समापन अब 3 नवंबर को होगा।


