रंजन सिन्हा

अक्षरा सिंह के नए गाने ‘लखनऊवा’ को लेकर भोजपुरी संगीत जगत में खूब चर्चाएं हो रही हैं। सोशल मीडिया पर कई लोग इसे पवन सिंह के माफ़ी प्रकरण का काउंटर जवाब मान रहे हैं। लेकिन इस पूरे मामले को सिर्फ पवन सिंह के जवाब के तौर पर देखना शायद सही नहीं होगा। दरअसल, जिंदगी और मनोरंजन की दुनिया में कई बार ऐसे दौर आते हैं, जब परिस्थितियां किसी कलाकार के लिए चुनौती बन जाती हैं। चारों तरफ सवाल होते हैं, चर्चाएं होती हैं और आलोचनाओं के बीच अपनी पहचान बनाए रखना आसान नहीं होता। लेकिन असली कलाकार वही होता है, जो इन तमाम परिस्थितियों के बावजूद अपना वजूद कायम रखे।

अक्षरा सिंह ने भी कुछ ऐसा ही कर दिखाया है। तमाम उतार-चढ़ाव, चर्चाओं और चुनौतियों के बीच उन्होंने अपनी पहचान को कमजोर नहीं पड़ने दिया। बल्कि अपने अंदाज में एक बार फिर दर्शकों के सामने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आंधियां कितनी भी तेज क्यों न हों, जो अपने वजूद को बचाए रखते हैं, उनकी पहचान कभी मिटती नहीं। अक्षरा सिंह के लिए भी ‘लखनऊवा’ को इसी नजरिए से देखा जा सकता है। लोग इसे किसी का जवाब मानें या महज एक नया गाना, लेकिन एक बात साफ है कि अक्षरा सिंह को किसी दूसरे कलाकार के नाम के सहारे पहचानने की जरूरत नहीं है। उनकी अपनी लोकप्रियता है, अपना दर्शक वर्ग है और भोजपुरी इंडस्ट्री में उनकी अपनी जगह है।
आखिरकार, किसी कलाकार की असली ताकत यह नहीं होती कि वह किसे जवाब दे रहा है, बल्कि यह होती है कि तमाम मुश्किलों के बावजूद वह अपनी पहचान और अपना मुकाम कैसे बनाए रखता है। अक्षरा सिंह ने आंधियों के बीच भी अपना वजूद बचाए रखा है। यही उनकी सबसे बड़ी कामयाबी है।


