घरेलू हिंसा के महज आरोप राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं : अदालत

दिल्ली की अदालत ने घरेलू हिंसा के आरोपों को साबित करने के लिए साक्ष्य जरूरी बताया, पति और ससुराल वालों के खिलाफ महिला की याचिका खारिज की।

Archana Ekka
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नयी दिल्ली : दिल्ली की एक अदालत ने पति और ससुराल वालों के खिलाफ एक महिला की घरेलू हिंसा की शिकायत खारिज करते हुए कहा कि केवल प्रताड़ना के आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है और कानून के तहत राहत पाने के लिए महिला को घरेलू हिंसा की कम से कम एक घटना साबित करनी होगी।

न्यायिक मजिस्ट्रेट ऋषिका श्रीवास्तव घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत महिला की ओर से अपने पति, सास-ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थीं। अदालत ने 28 अक्टूबर को दिए फैसले में कहा, “याचिकाकर्ता पर यह साबित करने की जिम्मेदारी है कि उसने कम से कम ऐसी किसी घटना का सामना किया है, जो घरेलू हिंसा की परिभाषा के दायरे में आती हो। तभी उसे ‘पीड़ित’ माना जा सकता है। इस संबंध में केवल आरोप लगाना पर्याप्त नहीं है।”

अदालत ने कहा कि कानून के तहत घरेलू हिंसा की परिभाषा व्यापक है, लेकिन याचिकाकर्ता को यह साबित करना होगा कि उसके साथ कम से कम ऐसी कोई घटना हुई है, जो इसके दायरे में आती हो केवल आरोप लगा देना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने कहा कि महिला ने अपने दावों के समर्थन में कोई साक्ष्य पेश नहीं किया इसलिए उसके आरोप अप्रमाणित और असिद्ध रहे। महिला ने आरोप लगाया था कि शादी के दौरान उसे शारीरिक, यौन और भावनात्मक प्रताड़ना झेलनी पड़ी।

याचिकाकर्ता ने दहेज के लिए उत्पीड़न और धमकियां दिए जाने का भी आरोप लगाया। महिला ने अपने पति पर उसकी अश्लील तस्वीरें प्रसारित करने की धमकी देने और उसके पिता से 35 लाख रुपये मांगने का भी आरोप लगाया था। महिला ने संरक्षण और आवास संबंधी आदेश जारी करने, हर महीने 40,000 रुपये गुजारा भत्ता देने और कथित मानसिक प्रताड़ना, भावनात्मक परेशानी तथा यौन हिंसा के लिए 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग की थी। महिला के पति, सास-ससुर और परिवार के अन्य सदस्यों की ओर से पेश अधिवक्ता मनीष भदौरिया ने आरोपों को खारिज किया।

उन्होंने दावा किया कि जनवरी 2021 में 10 लाख रुपये में विवाद का निपटारा हो गया था। अदालत को बताया गया कि महिला हर महीने 75,000 रुपये से अधिक कमाती थी और अपना सामान लेकर स्वेच्छा से ससुराल छोड़कर चली गई थी। अदालत ने गौर किया कि महिला को साक्ष्य पेश करने के लिए तीन अवसर दिए गए, लेकिन उसने न तो अपना साक्ष्य हलफनामा दाखिल किया और न ही अपना पक्ष रखने के लिए कोई कदम उठाया। इसके परिणामस्वरूप 26 सितंबर को साक्ष्य पेश करने का उसका अधिकार समाप्त कर दिया गया। अदालत ने कहा कि पति और ससुर के खिलाफ घरेलू हिंसा के आरोप साबित नहीं हो सके, जिसके बाद महिला की याचिका खारिज कर दी गयी।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।