जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने राज्य की नगरपालिकाओं, विशेषकर मानगो नगर निगम और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति (जेएनएसी) की बदहाल कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार किया है। सोशल मीडिया साइट एक्स पर उन्होंने मुख्यमंत्री सह नगर विकास मंत्री हेमंत सोरेन से सीधे हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा कि राज्य के नगर निकाय अब वैधानिक संस्थाओं की तरह नहीं, बल्कि मनमानी, राजनीतिक दबाव और जुगाड़ तंत्र के सहारे संचालित हो रहे हैं। इनके लिए बनाए गए नियम-कानून महज कागजी साबित हो रहे हैं और प्रशासनिक व्यवस्था की कीमत आम जनता अपनी दुर्दशा से चुका रही है।

सरयू राय ने कहा कि मानगो नगर निगम और जमशेदपुर अधिसूचित क्षेत्र समिति की कार्यशैली देखकर ऐसा लगता है कि इन संस्थाओं में कानून का शासन नहीं, बल्कि मनमर्जी का शासन चल रहा है। कचरा निष्पादन के मामले में इनका रवैया बेहद अमानवीय और जनविरोधी है। मोहल्लों में कचरे के ढेर लगे हैं, गंदगी सड़कों और बस्तियों तक फैल रही है, लेकिन नगर निकायों के जिम्मेदार अधिकारियों को इसकी कोई खास चिंता नहीं है। सफाई ठेकेदारों पर प्रशासन का नियंत्रण लगभग निष्प्रभावी हो गया है। ठेकेदार अपनी मर्जी से काम कर रहे हैं और अधिकारी जवाबदेही से बचते नजर आ रहे हैं।

उन्होंने आरोप लगाया कि सफाई जैसे बुनियादी जनसरोकार के विषय को भी कुछ लोगों ने राजनीतिक प्रदर्शन और प्रचार का माध्यम बना लिया है। मिशन 29 के नाम पर सक्रिय रीलबाज किरदार सरकार में अपने प्रभाव और पहुंच का हवाला देकर नगरपालिका के अधिकारियों को भयभीत कर रहे हैं। उन्होंने पूछा कि यदि नगर निकायों के अधिकारी राजनीतिक रसूख के दबाव में काम करेंगे तो फिर कानून, नियम और प्रशासनिक जवाबदेही का क्या अर्थ रह जाएगा? क्या नगरपालिकाएं जनहित में काम करेंगी या कुछ प्रभावशाली लोगों की इच्छाओं के अनुसार संचालित होंगी?
सरयू राय ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से सवाल किया कि आखिर नगर निकायों की इस अराजक कार्यशैली पर सरकार की चुप्पी क्यों है? नगर विकास विभाग का दायित्व संभालने के नाते मुख्यमंत्री को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि नगरपालिकाएं किसी राजनीतिक गुट, ठेकेदार या प्रभावशाली व्यक्ति की जागीर बनकर न रह जाएं। इन संस्थाओं का संचालन कानून और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए, न कि फोन, दबाव, धमकी और राजनीतिक सिफारिशों के आधार पर।
सरयू राय ने मुख्यमंत्री से मांग की कि मानगो नगर निगम और जेएनएसी सहित राज्य के सभी नगर निकायों की कार्यप्रणाली की समीक्षा कराई जाए। सफाई ठेकेदारों की जवाबदेही तय हो, कचरा उठाव और निष्पादन की नियमित निगरानी हो तथा काम में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों और ठेकेदारों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। पानी, सफाई, सड़क, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए एक जवाबदेह और प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने कहा कि जनसुविधाओं के मामले में गठबंधन का मोह, राजनीतिक पक्षधरता और तेरा-मेरा की मानसिकता बिल्कुल स्वीकार्य नहीं हो सकती। सरकार को यह तय करना होगा कि उसकी प्राथमिकता जनता है या राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ चुनिंदा लोग। नगरपालिका का काम नागरिकों को सुविधा देना है, न कि राजनीतिक आकाओं और प्रभावशाली किरदारों के दबाव में अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ना।
सरयू राय ने कहा कि नगरपालिकाओं को ‘नरकपालिका’ में तब्दील होने से रोकना सरकार की जिम्मेदारी है। जनता टैक्स और शुल्क इसलिए नहीं देती कि उसे बदले में कचरे के ढेर, गंदगी, टूटी सड़कें और प्रशासनिक मनमानी मिले। मुख्यमंत्री को अब केवल निर्देश जारी करने की औपचारिकता से आगे बढ़कर ठोस और दिखाई देने वाली कार्रवाई करनी होगी। उन्होंने मुख्यमंत्री से आग्रह किया कि वे राजनीतिक मोह और दबाव से ऊपर उठकर नगर निकायों को कानून के शासन के अधीन लाएं। जनसुविधाओं के लिए निष्पक्ष, पारदर्शी और जवाबदेह तंत्र स्थापित करें। यही जनता के प्रति सरकार की वास्तविक प्रतिबद्धता और जनविश्वास अर्जित करने का रास्ता है।


