
रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुक्रवार को एक मार्च के दौरान ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आइसा) की अध्यक्ष नेहा बोरा पर एक व्यक्ति ने स्याही फेंक दी और उन पर ‘राष्ट्र विरोधी’ होने का आरोप लगाया।
यह घटना बिरसा चौक के पास उस समय हुई, जब आइसा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (एआईएसएफ) के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर मार्च कर रहे थे।
इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए बोरा ने कहा, ‘‘स्याही फेंके जाने से मैं डरने वाली नहीं हूं। दिल्ली के आंदोलन के दौरान मैं पैलेट गन और लाठीचार्ज का भी सामना कर चुकी हूं। क्या उन्हें लगता है कि स्याही से देशभर के छात्रों और युवाओं के गुस्से को दबाया जा सकता है?
आइसा की एक नेता शिवानी ने कहा, ‘‘हम शांतिपूर्ण मार्च निकाल रहे थे। तभी भीड़ में से अचानक एक व्यक्ति निकला और उसने नेहा बोरा पर स्याही फेंक दी।’’
उन्होंने आरोप लगाया कि वह व्यक्ति भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित ‘गुंडा’ था।
एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि स्याही फेंकने के आरोपी व्यक्ति को हिरासत में ले लिया गया है।
मीडिया से बातचीत में उस व्यक्ति ने कहा, ‘‘नेहा बोरा, उमर खालिद की समर्थक हैं। मुझे वह पसंद नहीं हैं। वह राष्ट्रविरोधी हैं।’’
उमर खालिद को सितंबर 2020 में यूएपीए के तहत गिरफ्तार किया गया था। उस पर आरोप लगाया गया था कि वह फरवरी 2020 के दंगों के कथित मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक है। इन दंगों में 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे।
बोरा इससे पहले आंदोलन कर रहे छात्रों को समर्थन देने के लिए रांची के जयपाल सिंह स्टेडियम स्थित प्रदर्शन स्थल पर गईं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में प्रदर्शन कर रहे उन छात्रों का समर्थन करती हूं, जो व्यापक पैमाने पर कथित अनियमितताओं, घोटालों और भ्रष्टाचार के कारण जेपीएससी और जेएसएससी सीजीएल परीक्षाओं को रद्द करने तथा तुरंत दोबारा परीक्षा की तिथि घोषित करने की मांग कर रहे हैं।’’
उन्होंने झारखंड सरकार से आग्रह किया कि वह छात्रों की मांगों पर जल्द से जल्द ध्यान दे, उनसे बातचीत करे और अनशन पर बैठे छात्रों के स्वास्थ्य की देखभाल सुनिश्चित करे।
बोरा ने कहा, ‘‘मैं झारखंड और देशभर के छात्रों से भी अपील करती हूं कि वे इस आंदोलन से प्रेरणा लें, जैसे उन्होंने जंतर-मंतर के आंदोलन से ली थी, क्योंकि छात्र अपनी उचित मांगों को लेकर भूख हड़ताल पर बैठे हैं।’’
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में जारी प्रदर्शन का शुक्रवार को 14वां दिन है। इस दौरान छह प्रदर्शनकारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे रहे।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि सरकार से बार-बार अपील करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण उन्हें अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने के लिए मजबूर होना पड़ा।
मंगलवार रात पांच प्रदर्शनकारी, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं, झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) के नेता देवेंद्र नाथ महतो के साथ उनकी भूख हड़ताल में शामिल हो गए। वह पिछले छह दिनों से अनशन पर हैं।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने बृहस्पतिवार को सरकार के साथ बातचीत करने के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का गठन किया, ताकि गतिरोध को समाप्त किया जा सके। यह कदम मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के उस बयान के बाद उठाया गया, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी सरकार बातचीत के लिए हमेशा तैयार है।
प्रदर्शनकारी छात्रों और नौकरी के इच्छुक अभ्यर्थियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर चर्चा करने और समस्याओं का समाधान करने के लिए राज्य सरकार की ओर से कोई औपचारिक निमंत्रण प्राप्त नहीं हुआ है।
यह विरोध प्रदर्शन 25 जुलाई को यहां जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में ‘जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म्स मंच’ के बैनर तले शुरू हुआ था।

