झारखंड की शिक्षा नीति पर बवाल! आजसू ने Clustering System के खिलाफ राज्यपाल-सीएम को सौंपा विरोध पत्र

आजसू ने झारखंड की क्लस्टरिंग और पुनर्गठन नीति का विरोध करते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा, कहा- यह व्यवस्था छात्रों, कॉलेजों और क्षेत्रीय भाषाओं के भविष्य के लिए खतरनाक है।

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रांची: झारखंड की प्रस्तावित पुनर्गठन और क्लस्टरिंग प्रणाली नीति को लेकर राजनीतिक और शैक्षणिक हलकों में विरोध तेज हो गया है। इसी कड़ी में आजसू ने राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और अंगीभूत महाविद्यालयों में लागू किए जाने वाले इस संकल्प को तत्काल निरस्त करने की मांग करते हुए राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा है। आजसू ने अपने ज्ञापन में कहा कि उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा जारी विभिन्न संकल्प पत्रों के जरिए रांची विश्वविद्यालय समेत राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों के “पुनर्गठन” और “क्लस्टरिंग प्रणाली” को लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। संगठन ने इसे पूरी तरह अव्यावहारिक, छात्र-विरोधी और शिक्षा व्यवस्था को कमजोर करने वाला कदम बताया है।

ग्रामीण और कमजोर वर्ग के छात्रों पर असर की चिंता

आजसू का कहना है कि झारखंड जैसे राज्य में बड़ी संख्या में छात्र ग्रामीण, आदिवासी, दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आते हैं। ऐसे में मौजूदा व्यवस्था उन्हें अपने नजदीकी कॉलेजों में पढ़ने की सुविधा देती है, जहां कला, विज्ञान और वाणिज्य तीनों संकाय उपलब्ध रहते हैं। लेकिन प्रस्तावित सिस्टम लागू होने पर छात्रों को अलग-अलग विषयों के लिए दूर-दराज के कॉलेजों में जाना पड़ेगा, जिससे उन पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा और कई छात्र पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो सकते हैं।

छात्राओं की शिक्षा पर पड़ सकता है असर

संगठन ने चिंता जताई कि ग्रामीण और पारंपरिक परिवारों की छात्राओं पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा। दूरी और सुरक्षा कारणों से वे दूरस्थ कॉलेजों में पढ़ाई नहीं कर पाएंगी, जिससे महिला शिक्षा प्रभावित हो सकती है। आजसू ने कहा कि यह प्रस्ताव राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) की भावना के खिलाफ है, जो बहुविषयी शिक्षा को बढ़ावा देती है। जबकि यह व्यवस्था कॉलेजों को सीमित विषयों तक बांटने का प्रयास कर रही है, जो छात्रों के विकल्प कम करेगा।

कॉलेजों की पहचान और भाषाओं पर खतरा

संगठन ने कहा कि वर्षों से स्थापित कॉलेजों की बहुविषयी पहचान खत्म हो सकती है। साथ ही झारखंड की जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं-संताली, हो, मुंडारी, कुड़ुख, नागपुरी, खोरठा, पंचपरगनिया और कुड़माली के अध्ययन पर भी संकट गहरा सकता है। आजसू ने यह भी कहा कि प्रस्ताव में शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक पदों को समाप्त करने की बात है, जबकि पहले से ही कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है। इससे पढ़ाई, शोध और प्रशासनिक काम प्रभावित होंगे।

आजसू की प्रमुख मांगें

  • Clustering System को तुरंत वापस लिया जाए
  • सभी कॉलेजों में कला, विज्ञान और वाणिज्य संकाय पहले की तरह जारी रहें
  • जनजातीय और क्षेत्रीय भाषाओं के विभाग सुरक्षित रखे जाएं
  • पदों में कटौती रोककर नियमित नियुक्तियां की जाएं
  • नई व्यवस्था से पहले सभी हितधारकों से चर्चा की जाए

किन नेताओं ने सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन सौंपने वालों में प्रदेश सचिव सक्षम झा, प्रदेश सचिव राजेश सिंह, महानगर अध्यक्ष अमन साहू, निशांत लिंडा, मोहन कुमार, संदीप सिंह समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।