
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम में एक साधारण परिवार में हुआ था। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाया। उन्होंने सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली से विज्ञान में स्नातक और बाद में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। अपनी असाधारण वैज्ञानिक उपलब्धियों के कारण उन्हें देश-विदेश के लगभग 48 विश्वविद्यालयों से मानद उपाधियां प्राप्त हुईं।
संघर्ष से शिखर तक का प्रेरणादायक सफर
डॉ. कलाम का जीवन संघर्ष, मेहनत और संकल्प की मिसाल है। एक छोटे शहर से निकलकर भारत के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा करोड़ों युवाओं को प्रेरित करती है। वे हमेशा बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने का संदेश देते थे। उनकी सादगी, विनम्रता और दूरदर्शी सोच ने उन्हें जन-जन का प्रिय बना दिया।
भारत को मजबूत बनाने में अहम योगदान
डॉ. कलाम ने भारत के अंतरिक्ष और रक्षा कार्यक्रमों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने एसएलवी-III और पीएसएलवी जैसे प्रोजेक्ट्स में योगदान दिया, जिनसे भारत की अंतरिक्ष क्षमता मजबूत हुई। उनके नेतृत्व में अग्नि और पृथ्वी जैसी मिसाइलों का विकास हुआ, जिसके कारण उन्हें “मिसाइल मैन ऑफ इंडिया” कहा गया। वर्ष 1998 के पोखरण-II परमाणु परीक्षण में भी उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।
वैज्ञानिक से राष्ट्रपति बनने तक का सफर
डॉ. कलाम ने 1960 में डीआरडीओ (DRDO) में वैज्ञानिक के रूप में अपने करियर की शुरुआत की और 1969 में इसरो (ISRO) से जुड़े। 1999 से 2001 तक वे भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार रहे। वर्ष 2002 में वे भारत के 11वें राष्ट्रपति बने। वे ऐसे पहले वैज्ञानिक थे जिनका कोई राजनीतिक पृष्ठभूमि नहीं थी, फिर भी उन्होंने राष्ट्रपति पद को नई गरिमा और लोकप्रियता प्रदान की।
आज भी जीवित है उनकी विरासत
27 जुलाई 2015 को शिलांग में एक व्याख्यान के दौरान डॉ. कलाम का निधन हो गया। हालांकि वे आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार, पुस्तकें और राष्ट्र निर्माण का सपना आज भी करोड़ों भारतीयों को प्रेरित करता है। उनकी पुण्यतिथि हमें ज्ञान, परिश्रम और देशसेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देती है।

