रांची : नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर आईएफएस अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के संपूर्ण कार्यकाल की एसआइटी से जांच कराने की मांग की है। अपने पत्र में उन्होंने कहा है कि झारखंड कैडर के चर्चित आइएफएस अधिकारी राजीव लोचन बख्शी के रांची वन प्रमंडल के डीएफओ (वर्ष 2013-2018) के कार्यकाल के दौरान किए गए घोटालों को प्रधान महालेखाकार (AG) की ऑडिट रिपोर्ट ने पूरी तरह उजागर कर दिया है। इस गंभीर प्रकरण को लेकर मैंने पूर्व में राज्यपाल और एसीबी के अपर पुलिस महानिदेशक को भी तथ्यों से अवगत कराया है। राज्य के मुखिया होने के नाते यह आवश्यक है कि आप इन गंभीर प्रमाणित आरोपों पर संज्ञान लें। महालेखाकार की निरीक्षण रिपोर्ट में दर्ज वित्तीय गबन के कुछ प्रमुख तथ्य इस प्रकार हैं।

जाली मस्टर रोल के जरिए ₹1.03 करोड़ की लूट
अप्रैल 2016 से मार्च 2019 के बीच मात्र 95 मस्टर रोल्स की टेस्ट चेकिंग में ₹1.0383 करोड़ के फर्जी भुगतान का खुलासा हुआ है। नियमों का घोर उल्लंघन करते हुए इन मस्टर रोल्स पर मजदूरों के हस्ताक्षर या अंगूठे के निशान नहीं लिए गए, बल्कि ‘व्हाइटनर और ‘इरेजर‘ का धड़ल्ले से प्रयोग कर रिकॉर्ड से छेड़छाड़ की गई। भुगतान बैंक खातों के बजाय नकद (cash) दिखाया गया। यदि मात्र 95 मस्टर रोल्स में इतना बड़ा घोटाला है, तो उनके पूरे कार्यकाल में बनी हजारों योजनाओं में हुई करोड़ों की लूट का अनुमान लगाना कठिन नहीं है।
नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर वन भूमि का अपयोजन
वर्ष 2013-14 में श्री बख्शी ने ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के प्रस्तावों को नियम विरुद्ध 8 छोटे प्रस्तावों में खंडित कर दिया ताकि सरकार से पूर्वानुमति न लेनी पड़े। अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर 7.35 हेक्टेयर वन भूमि के अपयोजन का आदेश स्वयं दे दिया, जिससे यूजर एजेंसी को लाभ पहुंचा और राज्य सरकार को न्यूनतम ₹46.01 लाख की NPV राशि का सीधा नुकसान हुआ।
कैंपा (CAMPA) मद के ₹8.53 करोड़ का हिसाब गायब
वित्त वर्ष 2014-15 में विभिन्न रेंजरों को दिए गए ₹8,53,40,488/- के भारी अग्रिम का लेखा-जोखा ऑडिट दल से जानबूझकर छिपाया गया ताकि इसकी जांच न हो सके। इस राशि का राज्य में कहां उपयोग हुआ, इसका आज तक कोई भौतिक सत्यापन नहीं हुआ है।
बोगस सामग्री खरीद व फर्जी मजदूरी भुगतान
वित्त वर्ष 2013-14 में ₹1.80 करोड़ की सामग्री क्रय के वाउचर ऑडिट दल को दिखाए ही नहीं गए। जब सामग्री की वास्तविक खरीद ही नहीं हुई, तो उस कार्य पर खर्च की गई लगभग ₹5.45 करोड़ की मजदूरी भी पूर्णतः फर्जी और बोगस सिद्ध होती है। महालेखाकार की रिपोर्टें राज्य में सुशासन का आइना होती हैं। एक ही अधिकारी द्वारा इतनी भारी वित्तीय अनियमितताएं, जालसाजी और प्रशासनिक कदाचार किए जाने के पुख्ता प्रमाण होने के बावजूद श्री बख्शी को महत्वपूर्ण पदों से नवाजना सरकार की मंशा पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। जिम्मेदार विपक्ष का नेता होने के नाते मेरी आपसे यह स्पष्ट माँग है कि श्री राजीव लोचन बख्शी के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से प्राथमिकी दर्ज कराई जाए। उनके संपूर्ण कार्यकाल की एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन कर सघन फॉरेंसिक ऑडिट कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक उन्हें उनके वर्तमान महत्वपूर्ण दायित्वों से मुक्त किया जाए।


