बाइडेन ने चीन पर पेंटागन टास्क फोर्स की घोषणा की, शी को कार्रवाई की चेतावनी

न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने वाशिंगटन की बीजिंग रणनीति का चार्ट बनाने के लिए एक पेंटागन टास्क फोर्स की घोषणा की है और अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ बातचीत के दौरान कड़ा रुख दिखाते हुए साफ कह दिया कि वह एक खुले हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए प्रतिबद्ध हैं। व्हाइट हाउस ने यह जानकारी दी।

व्हाइट हाउस की ओर से उनकी बातचीत के बारे में जारी बयान के अनुसार, बुधवार को शी के साथ फोन पर वार्ता के दौरान, बाइडेन ने हांगकांग और शिनजियांग में मानवाधिकार और बीजिंग के व्यापारिक रुख संबंधी मुद्दे को भी उठाया।

बीजिंग की बढ़ती शक्ति और आक्रामक रुख के मद्देनजर बाइडेन ने पेंटागन के दौरे के दौरान चीन की चुनौतियों से निपटने और भविष्य की प्रतिस्पर्धा में अमेरिकी लोगों की जीत को सुनिश्चित करने के लिए एक राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय प्रयास का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, हमें शांति बनाए रखने और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में और विश्व स्तर पर हमारे हितों की रक्षा के लिए चीन की ओर से बढ़ती चुनौतियों का सामना करने की जरूरत है।

पेंटागन में, राष्ट्रपति ने नए टास्क फोर्स के गठन की भी घोषणा की जो रणनीति पर तत्काल प्रभाव से काम करेगा ताकि हम चीन से संबंधित मामलों पर मजबूती से आगे बढ़ सकें।

पेंटागन में अपने भाषण में, बाइडेन ने कहा कि चीन पर टास्क फोर्स हमारी रणनीति और ऑपरेशनल कॉन्सेप्ट, प्रौद्योगिकी, फोर्स पॉस्चर और बहुत कुछ देखने को देखेगा।

व्हाइट हाउस ने उनके पेंटागन के भाषण के बाद जारी बयान में कहा कि शी के साथ वार्ता के दौरान, बाइडेन ने अमेरिकी लोगों की सुरक्षा, समृद्धि, स्वास्थ्य की रक्षा करने और स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत को संरक्षित करने की अपनी प्राथमिकताओं पर जोर दिया।

उन्होंने बीजिंग के अनुचित आर्थिक नियम, हांगकांग में कड़ी प्रतिशोधात्मक कार्रवाई, शिनजियांग में मानवाधिकारों के हनन और ताइवान की ओर क्षेत्र में तेजी से मुखर कार्रवाई के बारे में अपनी बुनियादी चिंताओं को रेखांकित किया।

बयान में कहा गया, दोनों नेताओं ने कोविड-19 महामारी का मुकाबला करने और वैश्विक स्वास्थ्य सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और हथियारों के प्रसार को रोकने की साझा चुनौतियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया।

शी के साथ बाइडेन की फोन पर वार्ता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और क्षेत्र के प्रमुख सहयोगियों-जापान, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया के साथ चर्चा के बाद हुई है, जिसके दौरान उन्होंने हिंद-प्रशांत मुद्दों पर चर्चा की थी।

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