रांची : क्या अंग्रेजों के रॉयल एयरफोर्स से रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का कोई कनेक्शन है? तो इस सवाल का जवाब ये है कि जी हां, रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का अंग्रेजी राज और अंग्रेजों की रॉयल एयरफोर्स से पुराना कनेक्शन है। दरअसल, बिरसा मुंडा एयरपोर्ट जो पहले रांची एयरपोर्ट कहलाता था का निर्माण वर्ष 1941 में इंग्लैंड की रॉयल वायुसेना के लिए किया गया था।इस समय विश्व में सेकेंड वर्ल्ड वार चल रहा था। ऐसे में अंग्रेजों को एक मिलिट्री एयरपोर्ट की जरूरत थी। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए रांची एयरपोर्ट का निर्माण किया गया था। सेकेंड वर्ल्ड वार के दौरान रांची एयरपोर्ट ने मिलिट्री एयरपोर्ट के रूप में बखूबी काम किया।

वर्ष 1947 में देश आजाद हो गया। आजादी के दूसरे साल यानि वर्ष 1949 में इसे मिलिट्री एयरपोर्ट से सिविल एयरपोर्ट में तब्दील कर दिया गया। उस समय इस एयरपोर्ट का क्षेत्रफल 546.25 एकड़ था। तो एयरपोर्ट के इतिहास की बात हो चुकी है और अब वर्तमान की बात करते हैं। बदलते समय के साथ बिरसा मुंडा एयरपोर्ट ने भी अपने को बदला है। समय के साथ इस एयरपोर्ट से यात्रियों की संख्या भी बढ़ती जा रही है। 138 करोड़ की लागत से निर्मित बिरसा मुंडा एयरपोर्ट का नया टर्मिनल भवन अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। लगभग 19 हजार वर्गमीटर क्षेत्र में फैले इस टर्मिनल में एक समय में करीब 500 यात्रियों को संभालने की क्षमता है।
यहां आधुनिक सुरक्षा प्रणाली, पर्याप्त चेक-इन काउंटर, विस्तृत आगमन-प्रस्थान क्षेत्र और भविष्य के विस्तार की भी व्यवस्था की गई है। यही नहीं रांची एयरपोर्ट पहले ही आईएसओ प्रमाणन प्राप्त कर चुका है। सुरक्षा के लिहाज से आधुनिक एक्स-रे बैगेज स्कैनर, सीसीटीवी निगरानी, फायर सेफ्टी सिस्टम तथा एयर ट्रैफिक कंट्रोल की अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। एयरपोर्ट पर रनवे और एप्रन की क्षमता भी वर्तमान परिचालन के अनुरूप मजबूत मानी जा रही है।


