नयी दिल्ली: भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने सोमवार को दिल्ली में पिछले कुछ दिनों से मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों और इसके चलते लगाई गई पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘यह मेरा मुद्दा नहीं है।’’

प्रधान न्यायाधीश विज्ञान भवन में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के 33वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम से इतर पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
पिछले कुछ दिनों में दिल्ली के विभिन्न हिस्सों में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन हुए हैं। सप्ताहांत में राजधानी में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए। राष्ट्रीय राजधानी में बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई है, 10 अक्टूबर को 45 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए और शहर के सीमावर्ती इलाकों में सघन जांच की गई।
कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं और पूर्व मुख्यमंत्रियों सहित हजारों लोगों को हिरासत में लिया गया।
प्रदर्शनों और आवाजाही पर पाबंदियों के बारे में पूछे जाने पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि यह कानून-व्यवस्था से जुड़ा मामला है।
उन्होंने कहा, ‘‘यह मेरा मुद्दा नहीं है।’’
उच्चतम न्यायालय तक विपक्ष के मार्च के बारे में पूछे जाने पर सीजेआई ने कहा, ‘‘मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा।’’
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सीजेआई को पत्र लिखकर सोमवार शाम चार से पांच बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे ‘वोट चोरी’ के आरोपों पर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। उनकी मांगों में सीईसी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा, मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक और फिर से मतपत्रों के जरिये मतदान कराने की मांग शामिल है। हालांकि, सीजेआई ने उनसे मिलने से इनकार कर दिया।
मुलाकात से इनकार करने का कारण पूछे जाने पर सीजेआई ने कहा कि उन्होंने पत्र के जवाब में कुछ कारण बताए हैं और स्पष्ट किया है कि वह मुलाकात नहीं कर पाएंगे।
उन्होंने पत्र की विषयवस्तु बताने से इनकार करते हुए कहा, ‘‘आप पत्र की विषयवस्तु उनसे पूछिए। मैंने इसकी गोपनीयता बनाए रखी है।’’
सांसदों और कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन जारी रखने के बारे में पूछे जाने पर सीजेआई ने कहा कि उच्चतम न्यायालय के दरवाजे सभी के लिए खुले हैं। उन्होंने कहा कि आम नागरिक हो या किसी निर्वाचित निकाय का सदस्य, हर भारतीय नागरिक को न्यायालय तक पहुंचने का अधिकार है। न्यायालय कानून के अनुरूप मुद्दों पर सुनवाई करेगा और लोगों को उनके अधिकार दिलाएगा।
एक साथ चुनाव कराने के मुद्दे पर संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से मुलाकात नहीं करने के बारे में सीजेआई ने कहा कि इसके कई कारण थे। उन्होंने कहा कि मामले के भविष्य में न्यायालय पहुंचने की संभावना को देखते हुए हितों के टकराव से बचना जरूरी था। यह उनका और उनके साथी न्यायाधीशों का विचार था।
एक साथ चुनाव कराने संबंधी जेपीसी के अध्यक्ष पी पी चौधरी ने हाल में कहा था कि समिति के अनुरोध पर उच्चतम न्यायालय ने पहले न्यायाधीशों के साथ अनौपचारिक बातचीत तय की थी, लेकिन बाद में इसे यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ऐसा करना उचित नहीं होगा।


