जीडीपी आकलन की नयी पद्धति की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक की जाए: कांग्रेस

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने नए जीडीपी आंकड़ों पर सवाल उठाए। उन्होंने आधार वर्ष, संशोधित आंकड़ों, जीडीपी डिफ्लेटर और नई गणना पद्धति की प्रक्रिया सार्वजनिक करने की मांग की।

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नई दिल्ली: कांग्रेस ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के नये आंकड़ों को लेकर बृहस्पतिवार को सवाल उठाया और कहा कि मोदी सरकार को यह बताना चाहिए कि जीडीपी के आकलन की नयी पद्धति तैयार करने की प्रक्रिया क्या थी और इसमें किन विशेषज्ञों और संस्थाओं से सलाह ली गई तथा अलग-अलग घटकों को शामिल करने का आधार क्या रहा। पार्टी महासचिव जयराम रमेश ने यह भी कहा कि नयी पद्धति तैयार करने और उसे लागू करने की पूरी प्रक्रिया सार्वजनिक करने की जरूरत है।

रमेश ने एक बयान में कहा, ‘‘अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए जारी 7.8 प्रतिशत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि के आंकड़े को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।’’ उनका दावा है कि इस आंकड़े की गणना में इस्तेमाल किए गए पिछले आधार वर्ष यानी अप्रैल-जून 2025 के जीडीपी आंकड़े में कई बार संशोधन किया गया है। उनके मुताबिक, पहले करीब 86 लाख करोड़ रुपये के आसपास रहा यह आंकड़ा संशोधनों के बाद करीब 80 लाख करोड़ रुपये रह गया है।

रमेश ने कहा कि आधार वर्ष के आंकड़े में इतनी बड़ी गिरावट का असर मौजूदा तिमाही की वृद्धि दर पर पड़ना स्वाभाविक है। उन्होंने पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान का हवाला देते हुए दावा किया कि यदि पुराने आधार आंकड़े को बरकरार रखा जाता तो नाममात्र की वृद्धि करीब 2.6 प्रतिशत होती, न कि सरकार द्वारा बताई गई 10.3 प्रतिशत की वृद्धि दिखाई देती। कांग्रेस नेता ने यह भी सवाल उठाया कि पिछले चार वर्षों के जीडीपी आंकड़ों में व्यापक स्तर पर संशोधन क्यों किया गया?

रमेश के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 से लेकर पिछले चार वर्षों के आंकड़ों में नयी श्रृंखला के तहत नाममात्र जीडीपी में हर वर्ष और लगभग हर तिमाही में कमी आई है तथा चार वर्षों में कुल मिलाकर करीब 43 लाख करोड़ रुपये की कमी की गई है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि नयी पद्धति में ऐसा क्या बदलाव किया गया, जिसके चलते अर्थव्यवस्था के अनुमानित आकार में इतनी बड़ी गिरावट आई।

रमेश ने जीडीपी डिफ्लेटर को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में ‘जीडीपी डिफ्लेटर’ करीब 2.5 प्रतिशत रहा, जबकि इसी अवधि में खुदरा और थोक महंगाई के आंकड़ों में काफी अंतर दिखाई देता है। कांग्रेस महासचिव का कहना है कि इससे वास्तविक जीडीपी वृद्धि के आंकड़े और आम लोगों की कीमतों के अनुभव के बीच सवाल पैदा होते हैं। ‘जीडीपी डिफ्लेटर’ किसी अर्थव्यवस्था में उत्पादित सभी घरेलू वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलाव यानी मुद्रास्फीति को मापने का एक व्यापक पैमाना है।

रमेश ने विनिर्माण और निजी खपत के आंकड़ों पर भी चिंता जताई और दावा किया कि सुभाष चंद्र गर्ग की गणना के अनुसार विनिर्माण जीवीए (सकल मूल्य वर्धित) में 5.2 प्रतिशत और निजी खपत में 5.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। कांग्रेस ने कहा कि जीडीपी आंकड़ों की विश्वसनीयता को लेकर पहले भी अर्थशास्त्रियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की ओर से सवाल उठते रहे हैं और ऐसे में सरकार को नयी राष्ट्रीय आय पद्धति की प्रक्रिया, विशेषज्ञों से किए गए परामर्श और आंकड़ों में हुए बड़े बदलाव का विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया कि चार वर्षों के आंकड़ों में इतनी बड़ी कटौती क्यों हुई, नयी पद्धति के किन घटकों ने यह बदलाव किया, पद्धति तैयार करने में किससे सलाह ली गई और ऐसी डिफ्लेशन पद्धति अपनाने का क्या आधार है, जो वास्तविक जीडीपी गणना में महंगाई के प्रभाव को कम करती दिखाई देती है? संशोधित जीडीपी श्रृंखला के तहत, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में देश की आर्थिक वृद्धि दर वास्तविक आधार पर 7.8 प्रतिशत रही।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।