अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय चुनाव पर विवाद, राज्यपाल से हस्तक्षेप की मांग

Archana Ekka
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Controversy over Municipal Elections : रांची में अनुसूचित क्षेत्रों में प्रस्तावित नगरपालिका (आम) चुनाव–2026 को लेकर विरोध तेज हो गया है।

कोल्हान आदिवासी समन्वय मंच ने इस मुद्दे पर Governor से हस्तक्षेप करने की मांग की है।

मंच के मुख्य संयोजक अर्जुन मुंडा ने इस संबंध में राज्यपाल को एक विस्तृत पत्र सौंपा है। पत्र में कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका चुनाव (Municipal Elections) कराना संविधान के प्रावधानों के खिलाफ है।

संविधान संशोधन और कानूनी प्रावधानों का हवाला

मांग पत्र में बताया गया है कि 74वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1992 के तहत संविधान में भाग IX-A जोड़ा गया, जो नगर निकायों से जुड़ा है।

लेकिन संविधान के अनुच्छेद 243ZC में साफ कहा गया है कि यह प्रावधान पांचवीं अनुसूची के अंतर्गत आने वाले अनुसूचित क्षेत्रों में अपने आप लागू नहीं होगा, जब तक संसद द्वारा कोई विशेष कानून नहीं बनाया जाता।

मंच का कहना है कि ऐसा कोई विशेष कानून अब तक नहीं बनाया गया है।

आदिवासी स्वशासन और ग्राम सभा पर असर

मंच ने आरोप लगाया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगर निकाय व्यवस्था को जबरन लागू करना आदिवासी स्वशासन, ग्राम सभा की भूमिका और CNT/SPT जैसे संरक्षणात्मक कानूनों की भावना के खिलाफ है।

उनका कहना है कि इससे आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था कमजोर होगी।

राज्य निर्वाचन आयोग के प्रेस नोट पर आपत्ति

मंच ने 27 जनवरी 2026 को राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी Press Note पर भी सवाल उठाए हैं।

उनका कहना है कि प्रेस नोट में जिन संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया गया है, वे सामान्य क्षेत्रों पर लागू होते हैं, न कि अनुसूचित क्षेत्रों पर। इसलिए इस आधार पर चुनाव कराना उचित नहीं है।

PESA कानून का मुद्दा

पत्र में यह भी कहा गया है कि पंचायतों के लिए जहां PESA कानून लागू है, वहीं नगरपालिकाओं के लिए अब तक ऐसा कोई कानून अस्तित्व में नहीं है।

साथ ही राज्यपाल द्वारा झारखंड नगरपालिका अधिनियम, 2011 को अनुसूचित क्षेत्रों में लागू करने से संबंधित कोई वैध अधिसूचना भी जारी नहीं की गई है।

संविधान के अनुच्छेदों के उल्लंघन का आरोप

मंच का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 243ZF के अनुसार 74वें संशोधन से पहले के नगरपालिका कानून अधिकतम एक वर्ष तक ही प्रभावी रह सकते थे। समय पर संशोधन नहीं होने के कारण वे स्वतः अप्रभावी हो गए।

ऐसे में अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका व्यवस्था लागू करना अनुच्छेद 243ZC, 243ZF और 244(1) का उल्लंघन है।

तत्काल रोक और दिशा-निर्देश की मांग

इन सभी तथ्यों के आधार पर मंच ने राज्यपाल से मांग की है कि अनुसूचित क्षेत्रों में नगरपालिका (आम) चुनाव–2026 को तत्काल प्रभाव से रोका जाए।

साथ ही संविधान के अनुरूप आवश्यक वैधानिक और नीतिगत दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।

मांग पत्र की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य निर्वाचन आयुक्त झारखंड और शहरी विकास एवं आवास विभाग (Housing Department) के सचिव को भी भेजी गई है।

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अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।