


नयी दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंचने से सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पेट्रोल की बिक्री पर करीब पांच रुपये और डीजल पर 23 रुपये प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है। विश्लेषकों ने बुधवार को यह जानकारी दी। कच्चे तेल की कीमत जुलाई के बाद अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई है। इससे पहले 23 जुलाई को इसकी कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर थी।





अंतरराष्ट्रीय तेल मानक ब्रेंट क्रूड की कीमत 2.5 प्रतिशत बढ़कर 100 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो गई है, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (डब्ल्यूटीआई) कच्चा तेल करीब दो प्रतिशत बढ़कर 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। यह तेजी अमेरिका और ईरान के बीच हालिया तनाव तथा एक-दूसरे के खिलाफ की गई सैन्य कार्रवाई के बाद आई है।
दुनिया के तीसरे सबसे बड़े तेल आयातक और उपभोक्ता देश भारत पर अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ता है।
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से देश का डॉलर में होने वाला आयात खर्च बढ़ता है, जिससे व्यापार घाटे और रुपये पर दबाव पड़ सकता है।
