

नई दिल्ली : पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान की पूर्व संध्या पर दार्जिलिंग की पहाड़ियों में एक बड़ी सियासी हलचल शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार को गोरखाालैंड के 119 साल पुराने संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा बयान देकर न केवल चुनावी सरगर्मी बढ़ा दी है, बल्कि राज्य की ममता बनर्जी सरकार को भी सीधे चुनौती दी है। शाह ने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार अब इस मुद्दे के समाधान के लिए राज्य सरकार के सहयोग का इंतजार नहीं करेगी।





दार्जिलिंग, कालिंपोंग और कलिम्पोंग की सीटों पर होने वाले कल के मतदान से पहले शाह का यह ‘एक्सप्लेनर’ पहाड़ियों के राजनीतिक भविष्य की नई दिशा तय कर सकता है। गृह मंत्री अमित शाह ने दिल्ली में एक जनसभा को संबोधित करते हुए बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोला।
उन्होंने खुलासा किया कि गृह मंत्री के रूप में उन्होंने इस जटिल समस्या को सुलझाने के लिए तीन महत्वपूर्ण बैठकें आयोजित की थीं। शाह ने आरोप लगाया, “हैरानी की बात है कि इन बैठकों में राज्य सरकार का एक भी प्रतिनिधि शामिल नहीं हुआ।” शाह के इस बयान ने साफ कर दिया है कि केंद्र अब राज्य की सहमति के बिना ही “स्थाई राजनीतिक समाधान” (PPS) की ओर कदम बढ़ा रहा है।
