पासपोर्ट अधिनियम के मामले में दिल्ली की अदालत ने आरोपी को बरी किया

दिल्ली की अदालत ने कथित फर्जी मलेशिया वीजा मामले में पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप रद्द करते हुए कहा कि पर्याप्त साक्ष्य के बिना आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता।

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नयी दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने मलेशिया का कथित फर्जी वीजा रखने के आरोप में एक व्यक्ति के खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप तय करने के मजिस्ट्रेट के आदेश को यह कहते हुए रद्द कर दिया कि ऐसा कोई आरोप नहीं है कि उसने कभी मलेशिया की यात्रा की या उस वीजा में कोई फर्जीवाड़ा किया था। अदालत ने कहा कि आपराधिक अदालत ‘‘अटकलों का मंच नहीं है। यह ऐसा मंच है, जहां आरोप तय करने के शुरुआती चरण में भी अभियोजन के पास ऐसे साक्ष्य होने चाहिए, जो प्रथम दृष्टया किसी विचारणीय अपराध का आधार प्रस्तुत करते हों।’’
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर, पलविंदर सिंह की पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई कर रहे थे। पलविंदर सिंह ने मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा 29 जनवरी 2026 को पारित उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के तहत आरोप तय किए गए थे।

मामले के अनुसार, पलविंदर सिंह 12 नवंबर 2017 को तुर्किये के रास्ते अजरबैजान की राजधानी बाकू के लिए रवाना हुए थे। इस्तांबुल पहुंचने पर उन्होंने तुर्किये का कागजी ई-वीजा और अपने पासपोर्ट के पृष्ठ 16 पर लगा अमेरिका का एक अतिरिक्त वीजा प्रस्तुत किया। तुर्किये के अधिकारियों ने उनका तुर्किये वीजा अमान्य बताते हुए उन्हें वापस भारत भेज दिया, क्योंकि उससे संबद्ध अमेरिकी वीजा कथित रूप से फर्जी पाया गया था। जांच के दौरान पासपोर्ट के एक अन्य पृष्ठ पर लगा मलेशिया का वीजा स्टिकर भी ‘‘असली नहीं’’ पाया गया, जबकि तुर्किये और अजरबैजान के ई-वीजा ‘‘असली’’ थे। इसके बाद सिंह को इस्तांबुल से नयी दिल्ली हवाई अड्डे वापस भेज दिया गया और उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम के अलावा भारतीय दंड संहिता की धारा 420 (धोखाधड़ी), 468 (धोखाधड़ी के उद्देश्य से जालसाजी) और 471 (फर्जी दस्तावेज को असली के रूप में इस्तेमाल करना) के तहत मामला दर्ज किया गया।

हालांकि, मजिस्ट्रेट अदालत ने क्षेत्राधिकार के अभाव और आवश्यक कानूनी मंजूरी नहीं होने के कारण अमेरिकी फर्जी वीजा से जुड़े मामले में सिंह को आरोपमुक्त कर दिया था, लेकिन मलेशिया के कथित फर्जी वीजा के संबंध में उनके खिलाफ पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 (अपराध एवं जुर्माना) के तहत आरोप तय किए थे। न्यायाधीश लालेर ने दो जुलाई के अपने आदेश में कहा, ‘‘मजिस्ट्रेट अदालत ने आईपीसी की धाराओं 420, 468 और 471 के तहत आरोपी को आरोपमुक्त करके सही किया, लेकिन पासपोर्ट अधिनियम की धारा 12 के तहत आरोप तय करने में गलती की। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई आवश्यक साक्ष्य नहीं है, जो मलेशिया के वीजा को भारत से प्रस्थान, भारत में प्रवेश या भारत के भीतर उसे प्राप्त किए जाने से जोड़ता हो।’’

अदालत ने कहा कि वीजा स्टिकर पर पहले की तारीख अंकित होने मात्र से यह साबित नहीं होता कि उसे भारत में पासपोर्ट पर चिपकाया गया था या 12 नवंबर को जब आरोपी ने भारत के आव्रजन जांच केंद्र से यात्रा की थी, तब वह स्टिकर पासपोर्ट के किसी पृष्ठ पर मौजूद था। अदालत ने कहा, ‘‘ऐसा निष्कर्ष तभी वैध रूप से निकाला जा सकता था, जब यह दर्शाने वाली सामग्री मौजूद होती कि पुनरीक्षण याचिकाकर्ता वास्तव में उस वीजा के साथ भारत से रवाना हुआ था और उसने उसका इस्तेमाल किया था या भारत में अथवा मलेशिया पहुंचने पर किसी भी स्तर पर उसका इस्तेमाल करने या करने का प्रयास किया था। रिकॉर्ड पर ऐसी कोई सामग्री मौजूद नहीं है। बल्कि, यह आरोप तक नहीं है कि पुनरीक्षण याचिकाकर्ता कभी मलेशिया गया था या वहां जाने का प्रयास किया था।’’

अदालत ने कहा कि किसी ऐसे दस्तावेज के आधार पर आरोप तय नहीं किए जा सकते, ‘‘जिसका स्रोत पूरी तरह स्थापित न हो’’, केवल इसलिए कि उसकी तारीख भारत से प्रस्थान की तारीख से पहले की है। पासपोर्ट अधिनियम के मामले से सिंह को आरोपमुक्त करते हुए अदालत ने कहा, ‘‘दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 (भारत के बाहर किए गए अपराधों के लिए अभियोजन की मंजूरी) की आवश्यकता मलेशिया के वीजा के मामले में भी उसी प्रकार लागू होती है, जैसे अमेरिकी वीजा के मामले में लागू होती है।’’ न्यायाधीश ने कहा, ‘‘आपराधिक न्याय व्यवस्था कभी भी अनुमान, संदेह या किसी संदिग्ध दस्तावेज की मात्र मौजूदगी पर आधारित नहीं होनी चाहिए, चाहे परिस्थितियां पहली नजर में कितनी भी असामान्य क्यों न प्रतीत हों। आपराधिक अदालत केवल पासपोर्ट के किसी पन्ने पर चिपके कागज के एक टुकड़े की मौजूदगी के आधार पर फैसला नहीं सुना सकती।’’

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Avantika Raj Choudhary एक अनुभवी और बहुआयामी पत्रकार हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में तीन वर्षों का समृद्ध अनुभव प्राप्त है। इस दौरान उन्होंने एंकरिंग, रिपोर्टिंग, स्क्रिप्ट राइटिंग और वेबसाइट संचालन जैसे मीडिया के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी मजबूत पहचान बनाई है। खबरों की गहरी समझ, प्रभावशाली प्रस्तुति और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को संवेदनशीलता के साथ सामने लाने की उनकी क्षमता उन्हें एक सशक्त मीडिया प्रोफेशनल बनाती है। अपने करियर के दौरान Avantika ने Jharkhand Live, The Fourth Pillar, 22 Scope और Khabar Mantra जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में कार्य किया है, जहाँ उन्होंने अपनी पेशेवर दक्षता, मेहनत और रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। एंकर के रूप में उनकी प्रभावशाली संवाद शैली, रिपोर्टर के रूप में जमीनी हकीकत को सामने लाने की क्षमता, और स्क्रिप्ट राइटर के रूप में सटीक एवं आकर्षक लेखन ने उन्हें मीडिया जगत में एक अलग पहचान दिलाई है। डिजिटल और ग्राउंड मीडिया दोनों प्लेटफॉर्म्स पर कार्य करने का अनुभव रखने वाली Avantika Raj Choudhary पत्रकारिता के बदलते स्वरूप के साथ खुद को निरंतर अपडेट करती रही हैं। उनकी कार्यशैली में निष्पक्षता, समर्पण और दर्शकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाने का उद्देश्य स्पष्ट रूप से झलकता है। मीडिया इंडस्ट्री में उनका यह अनुभव और कौशल उन्हें भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की ओर अग्रसर करता है.