मुंबई: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गणेश उत्सव को देखते हुए मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे से सोमवार को अपील की कि वह इस हफ्ते के आखिर में मुंबई में प्रस्तावित विरोध प्रदर्शन पर फिर से विचार करें।
यहां पत्रकारों से बात करते हुए फडणवीस ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार ने जरांगे के साथ बातचीत कभी बंद नहीं की। जरांगे मराठा आरक्षण के मुद्दे पर जालना जिले के अंतरवाली सराटी गांव में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे हैं, जो सोमवार को 16वें दिन में प्रवेश कर गई।
उन्होंने कहा, “जरांगे द्वारा की गई लगभग सभी मांगें पूरी कर दी गई हैं। कुछ मांगें अदालत में विचाराधीन हैं और अलग-अलग चरणों में हैं। लेकिन अदालत या अन्य संवैधानिक मंचों से संपर्क किए बिना मांगें पूरी नहीं हो सकतीं। हमने उन्हें इस बारे में सूचित कर दिया है।”
मुख्यमंत्री ने जोर देकर कहा कि राज्य सरकार आरक्षण के मुद्दे पर ऐसा कुछ नहीं कर सकती जो मौजूदा कानूनों के मुताबिक न हो और वह संविधान का सख्ती से पालन करेगी।
भाजपा नेता ने कहा, “ (सोमवार से शुरू हुए) गणेश उत्सव के दौरान विरोध-प्रदर्शन करना, जिससे गणेश भक्तों को परेशानी हो सकती है, सही नहीं है। इसलिए, इस पर (मुंबई में विरोध-प्रदर्शन पर) फिर से विचार किया जाना चाहिए।”
मुंबई में भूख हड़ताल की इजाजत न मिलने पर, अपने रुख पर अड़े जरांगे ने सोमवार को घोषणा की कि वह 15 सितंबर को अकेले महाराष्ट्र की राजधानी जाएंगे और आजाद मैदान में विरोध प्रदर्शन करेंगे।
मुंबई से लगभग 400 किलोमीटर दूर अंतरवाली सराटी गांव में समर्थकों को संबोधित करते हुए, 44 वर्षीय कार्यकर्ता ने फडणवीस पर डर के कारण विरोध प्रदर्शन को रोकने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि फडणवीस गणेश उत्सव के दौरान अशांति पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि इसके लिए मराठा समुदाय को जिम्मेदार ठहराया जा सके।
पुलिस ने रविवार को जरांगे को 19 सितंबर से शहर में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया। उन्होंने इसके लिए चल रहे गणेशोत्सव के दौरान सुरक्षा संबंधी संभावित चिंताओं का हवाला दिया।
जरांगे ने जोर देकर कहा कि वह अपनी मांगों पर अडिग रहेंगे। उन्होंने अपने समर्थकों से कहा कि वे अपने संसाधन बचाकर रखें और अपने गांवों में शांति बनाए रखें, जबकि वह मुंबई में आंदोलन संभालेंगे।
जरांगे की मुख्य मांगों में से एक यह है कि सरकार एक आदेश (जीआर) जारी करे, जिससे मराठा समुदाय पुराने रिकॉर्ड और सरकारी गजट के दस्तावेजों के आधार पर ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ (ओबीसी) श्रेणी में ‘कुनबी’ समुदाय को मिलने वाले आरक्षण का दावा कर सके।
ओबीसी समूहों ने इस मांग का विरोध किया है। उनका कहना था कि अगर मराठा समुदाय को ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ श्रेणी के तहत आरक्षण दिया जाता है, तो उन्हें मिलने वाले लाभ का हिस्सा कम हो जाएगा।
कुनबी एक कृषि-आधारित समुदाय है, जिसे महाराष्ट्र में शिक्षा और सरकारी नौकरियों में लाभ पाने के लिए आधिकारिक तौर पर ओबीसी के रूप में मान्यता प्राप्त है।

