
Dishom Guru Shibu Soren awarded the Padma Bhushan : झारखंड की धरती से जुड़े महान नेता दिशोम गुरु शिबू सोरेन (Shibu Soren) को मरणोपरांत पद्म भूषण (Padma Bhushan) सम्मान दिए जाने की घोषणा ने राज्यवासियों में गर्व और भावुकता दोनों भर दी है।
गुरुजी ने अपने पूरे जीवन में झारखंड में फैली अशिक्षा, नशाखोरी और सूदखोरी के खिलाफ मजबूत संघर्ष किया।
झारखंड अलग राज्य के आंदोलन को दिशा देने में उनका योगदान ऐतिहासिक रहा है। वर्षों तक नेतृत्व करते हुए उन्होंने गरीब, शोषित और वंचित वर्गों की आवाज़ को मजबूती से उठाया।
गुरुजी का संघर्ष और योगदान
दिशोम गुरु Shibu Soren ने समाज सुधार के लिए लगातार काम किया। उनका जीवन जनआंदोलनों और रचनात्मक प्रयासों से भरा रहा।
उन्होंने आदिवासी समाज के अधिकारों की रक्षा की और सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक उत्थान के लिए संघर्ष किया। उनके विचार और आदर्श आज भी झारखंड के युवाओं के लिए प्रेरणा हैं।
पद्म भूषण सम्मान पर राजनीतिक प्रतिक्रिया
पद्म भूषण सम्मान की घोषणा पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं। BJP प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत सरकार द्वारा लिए गए इस निर्णय का स्वागत किया।
उन्होंने कहा कि यह सम्मान झारखंड की मिट्टी और गुरुजी के संघर्षों का सम्मान है। उनके अनुसार गुरुजी का पूरा जीवन समाज और लोककल्याण के लिए समर्पित रहा।
कांग्रेस की प्रतिक्रिया
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष Keshav Mahato Kamlesh ने भी इस सम्मान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गुरुजी के योगदान की तुलना किसी से नहीं की जा सकती।
झारखंड आंदोलन के निर्माण में गुरुजी द्वारा किए गए संघर्ष और रचनात्मक कार्य आज भी लोगों के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने इसे झारखंड के गरीब और शोषित वर्गों के सम्मान से जोड़ा।
झारखंडवासियों की भावना
झारखंड के लोगों की लंबे समय से यह इच्छा थी कि राज्य और समाज के लिए दिए गए गुरुजी के योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिले।
इस निर्णय से लोगों को उम्मीद है कि गुरुजी के संघर्षों और आदर्शों को याद रखते हुए देश आगे भी इसी दिशा में काम करेगा।
सम्मान से मिली नई प्रेरणा
अंत में यह कहा जा सकता है कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मिला यह पद्म भूषण सम्मान झारखंड के इतिहास का गर्वपूर्ण अध्याय है। यह आने वाली पीढ़ियों को समाज के लिए निस्वार्थ सेवा और संघर्ष का संदेश देता है।

