Diwali 2026: दिवाली आते ही लोगों में अलग उत्साह देखने को मिलता है। इसके साथ ही बदलते मौसम में वो हल्की ठंड का एहसास अपने आप में त्योहारों के शुरु होने का संदेश रहा होता है। लोग कार्तिक शुरु होते ही घरों में साफ-सफाई और सजावट करने लगते है। लेकिन क्या आप जानते है, उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में दिवाली के दिन एक ऐसी परंपरा निभाई जाती है जो आपके बचपन की यादों को ताजा कर देंगी। वह परंपरा है घरौंदा बनाने की। हर घर में बच्चे मिट्टी, गत्ते या लकड़ी से छोटा-सा घर बनाते हैं और उसे रंगों, दीयों, फूलों, रंग-बिरंगे कागजों, और खिलौनों से सजाते हैं। लेकिन क्या आपको मालूम हैं कि दिवाली पर घरौंदा क्यों बनाया जाता है और इसका क्या महत्व है? आइए जानते है…

दिपावाली पर घरौंदा बनाने की परंपरा क्यों?
यह घरौंदा एक छोटे घर का प्रतीक होता है। लोग इसे सुख-समृद्धि, खुशहाली और बेहतर भविष्य की कामना से जोड़कर देखते है। मां लक्ष्मी के स्वागत के लिए दिवाली पर घरों में जोरों-शोरों से सफाई और सजावट की जाती है। इसी भावना के साथ उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में कई परिवार घरौंदा बनाकर उसे सुंदर तरीके से सजाते हैं। जो परिवार के सुखी और समृद्ध जीवन की कामना को दर्शाता है।

मां लक्ष्मी से घरौंदे का संबंध
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली पर सुख, सौभाग्य और समृद्धि की कामना के लिए घरों और दुकानों में मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है। वैसे ही घरौंदे को भी एक सुंदर और खुशहाल घर का प्रतीक माना जाता है। लोग इसकी पूजा कर, इसके पास दिया जलाते है। और कामना करते है कि उनके घर में भी ऐसे ही हर समय समृद्धि बने रहे। हालांकि, इसकी पूजा और इससे जुड़ी मान्यताएं अलग-अलग जगहों में भिन्न हो सकती हैं।
घरौंदे में छोटे-छोटे बर्तन और खिलौने रखने का है अलग महत्व
घरौंदे के साथ-साथ मिट्टी के छोटे बर्तन, चूल्हा, थाली और खिलौने को भी पूजा जाता है। ये चीजें घर की रसोई और पारिवारिक जीवन का प्रतीक मानी जाती हैं। खिलौने घर में बच्चों के होने से खुशी और चहल-पहल को दर्शाते हैं। वहीं, छोटे-छोटे बर्तनों में मकई से बना लावा और मिठाईयों को भरा जाता है, जिसका मतलब है कि उनकी रसोई भी उन बर्तनों की तरह हमेशा भरी रहे।
इन राज्यों में खासकर निभाई जाती है यह परंपरा
झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह परंपरा खासकर निभाई जाती है। बच्चों में दिवाली पर घरौंदा बनाने का अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। पहले इसे मिट्टी और ईंटों से बनाया जाता था, लेकिन अब अधिकतर लोग इसे गत्ते, लकड़ी और रंगीन कागज से बनाते है। और कुछ तो इसे बाजार से खरीद कर लाते हैं। यह परंपरा नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति से जोड़ने का अच्छा मौका देती है।
घरौंदा सिर्फ परंपरा नहीं, बच्चों के लिए है सपनों का घर
घरौंदा बनाने की परंपरा सिर्फ धार्मिक मान्यताओं तक सीमित नहीं है। यह बच्चों के लिए सपनों का घर है। वे इसे बहुत ही प्यार और मन से सजाते है। इस तरह घरौंदा दिवाली की खुशियों, पारिवारिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक माना जाता है।


