रांची: बोकारो जिले के चास अंचल स्थित मौजा तेतुलिया में लगभग 103 एकड़ अधिसूचित संरक्षित वन भूमि की अवैध खरीद-बिक्री के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए चार्जशीट दाखिल की है। ईडी के रांची जोनल कार्यालय द्वारा रांची स्थित पीएमएलए (PMLA) की विशेष अदालत में दर्ज की गई शिकायत में इस पूरे जमीन घोटाले में अपराध से अर्जित कुल संपत्ति का वर्तमान बाजार मूल्य 566.50 करोड़ रुपये आंका गया है।

जांच के अनुसार, इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड शैलेश कुमार सिंह है। उसने फर्जी दस्तावेजों और प्रशासनिक मिलीभगत से करोड़ों की सरकारी वन भूमि को हड़पने का खेल रचा। शैलेश सिंह ने 23 जनवरी 2021 को ‘मेसर्स उमा आयुष मल्टीकॉम प्राइवेट लिमिटेड’ नाम से एक शेल (फर्जी) कंपनी बनाई। इस कंपनी में उसने अपने 27 वर्षीय बेटे आयुष सिंह और 15 हजार रुपये के मासिक वेतन पर काम करने वाले अपने घरेलू रसोइये ललन सिंह को निदेशक (डायरेक्टर) बना दिया। कंपनी के गठन के मात्र 18 दिन बाद, 10 फरवरी 2021 को शैलेश सिंह ने पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर विक्रेता बनकर 74.38 एकड़ जमीन अपनी ही बनाई हुई शेल कंपनी को 10.30 करोड़ रुपये में बेच दी, जबकि इसका सरकारी मूल्यांकन 23.14 करोड़ रुपये था। इतना ही नहीं, इस सौदे में जिन चार चेक का हवाला दिया गया था, वे कभी बैंक में जमा ही नहीं किए गए। ईडी की छापेमारी में शैलेश सिंह के ठिकाने से विक्रेता अख्तर हुसैन के हस्ताक्षर किए हुए 19 कोरे (ब्लैंक) चेक भी बरामद हुए हैं।
जमीन पर मालिकाना हक जताने के लिए 90 साल पुराने 1933 के फर्जी नीलामी पत्र और 2004 के फर्जी दानपत्र का सहारा लिया गया। जांच में पाया गया कि 1933 की संबंधित वॉल्यूम की किताब में कुल 80 पन्ने ही थे, जबकि फर्जी दस्तावेज में पन्ना संख्या 83-84 दर्शाया गया था। साथ ही, कथित खरीदार समीर महतो उस समय नाबालिग था और 2004 के दानपत्र को 2009 में बैकडेट करके तैयार करने के भी सबूत मिले हैं।
इस फर्जीवाड़े में प्रशासनिक अधिकारियों की भी साठगांठ सामने आई है। चार्जशीट के मुताबिक, तत्कालीन अंचलाधिकारी (सीओ) निर्मल कुमार टोप्पो ने महज 14 दिनों में सरकारी रिकॉर्ड बदलवा दिए। 5.22 डिसमिल जमीन के रिकॉर्ड से नाम हटाकर हुसैन बंधुओं का नाम दर्ज किया गया और फर्जी जमाबंदी बनाकर इसे 1.03 एकड़ से बदलकर 103 एकड़ कर दिया गया। इस अवैध काम के बदले सीओ टोप्पो पर 3.11 लाख रुपये रिश्वत लेने का आरोप लगा, जिसके बाद सरकार ने उन्हें बर्खास्त कर दिया था।


