रांची: म्यूचुअल फंड उद्योग अब केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहकर विकास के नए रास्तों पर आगे बढ़ रहा है। हिंदी भाषी क्षेत्रों के छोटे शहर और कस्बे निवेशकों के एक बेहद महत्वपूर्ण स्रोत के रूप में उभर रहे हैं। देश के टॉप-30 शहरों के बाहर (बी-30 शहरों) से म्यूचुअल फंड की मांग में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है। डिजिटल प्लेटफॉर्म की सुलभता और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के प्रति युवाओं की बढ़ती रुचि ने छोटे शहरों के लोगों को शेयर बाजार से जोड़ने में अहम भूमिका निभाई है।

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) के जुलाई 2026 तक के आंकड़ों के अनुसार, बिहार और झारखंड में म्यूचुअल फंड निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। झारखंड में बीते नौ महीनों के दौरान म्यूचुअल फंड निवेश में 9.01 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है, जो राष्ट्रीय औसत 7.89 प्रतिशत से अधिक है। आंकड़े बताते हैं कि अक्टूबर 2025 में झारखंड में म्यूचुअल फंड का कुल निवेश 84,663 करोड़ रुपये था, जो इस अवधि में बढ़कर 92,290 करोड़ रुपये पर पहुंच गया। वहीं बिहार में भी इस दौरान म्यूचुअल फंड निवेश 10.05 प्रतिशत बढ़कर 87,475 करोड़ रुपये से 94,833 करोड़ रुपये हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल माध्यमों से निवेश प्रक्रिया का आसान होना इसका सबसे बड़ा कारण है। डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल ऐप्स की सहज उपलब्धता के चलते अब लोगों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने या एसआईपी शुरू करने के लिए वितरकों या वित्तीय संस्थानों के कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ते। पहली बार बाजार में कदम रखने वाले लोग पारंपरिक फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) के बजाय म्यूचुअल फंड और एसआईपी को प्राथमिकता दे रहे हैं। तकनीक की मदद से निवेश की इस सुगम प्रक्रिया ने हिंदी पट्टी के छोटे शहरों में वित्तीय साक्षरता और निवेश संस्कृति को एक नई दिशा दी है।


