मुंबई: भारत के सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र में औपचारिक कर्ज का करीब 60 लाख करोड़ रुपये का अंतर है। मौजूदा संस्थागत माध्यम छोटे उद्यमों की कर्ज की मांग का केवल 30-40 प्रतिशत ही पूरा कर पाते हैं। एक रिपोर्ट में यह बात सामने आई। रिपोर्ट में साथ ही कहा गया कि कारोबार, बैंकों, वित्तदाताओं, भुगतान सेवा प्रदाताओं और सार्वजनिक प्रणालियों समेत प्रमुख आर्थिक हितधारकों को निर्बाध रूप से जोड़ने वाली एक केंद्रीकृत एवं परस्पर संचालनीय डिजिटल प्रणाली एमएसएमई के कर्ज अंतर को पाटने में मदद कर सकती है। इससे देश के औपचारिक कारोबारी क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।



