
नई दिल्ली : पूर्वोत्तर भारत का शांत राज्य मेघालय जल्द ही अंतरराष्ट्रीय सैन्य गतिविधियों का केंद्र बनने जा रहा है। भारतीय सेना 18 से 31 मई तक उमरोई स्थित ‘फॉरेन ट्रेनिंग नोड’ में एक अभूतपूर्व बहुपक्षीय सैन्य अभ्यास की मेजबानी करने के लिए पूरी तरह तैयार है। इस अभ्यास को ‘प्रगति’ (PRAGATI) नाम दिया गया है। यह केवल एक नियमित सैन्य ड्रिल नहीं है, बल्कि पहली बार है जब भारत इस स्तर पर 11 मित्र देशों के साथ मिलकर अपनी सैन्य रणनीति और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन करेगा। ‘प्रगति’ (PRAGATI) का पूरा नाम है— ‘पार्टनरशिप ऑफ रीजनल आर्मीज फॉर ग्रोथ एंड ट्रांसफॉर्मेशन इन द इंडियन ओशन Region’। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इसका मुख्य लक्ष्य हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में स्थिरता लाना है। भारतीय सेना का कहना है कि यह अभ्यास रक्षा सहयोग को गहरा करने, आपसी विश्वास को मजबूत करने और अलग-अलग देशों की सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल (Interoperability) बैठाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। आज के दौर में जब वैश्विक भू-राजनीति तेजी से बदल रही है, भारत ‘प्रगति’ के जरिए यह संदेश देना चाहता है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और सामूहिक विकास के लिए अपने पड़ोसी देशों को साथ लेकर चलने के लिए प्रतिबद्ध है। 15 को न्योता, 11 देशों का साथ: कौन-कौन बनेगा भागीदार?
भारतीय सेना ने इस ऐतिहासिक अभ्यास के लिए कुल 15 देशों को निमंत्रण भेजा था। इन देशों की सूची में बांग्लादेश, भूटान, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलेशिया, मालदीव, म्यांमार, नेपाल, फिलीपींस, सेशेल्स, सिंगापुर, श्रीलंका, थाईलैंड और वियतनाम शामिल हैं। सेना की पूर्वी कमान ने हाल ही में पुष्टि की है कि ‘प्रगति-I’ के लिए अंतिम योजना सम्मेलन (Final Planning Conference) सफलतापूर्वक संपन्न हो चुका है और 11 मित्र देशों के प्रतिनिधिमंडल इसमें शामिल होने के लिए मेघालय पहुंचेंगे।
युद्ध के मैदान में जब दिखेंगे रोबोटिक खच्चर और AI
इस युद्धाभ्यास का सबसे अनूठा और अहम हिस्सा है इसमें शामिल ‘इंडस्ट्री एक्सपो’। फिक्की (FICCI) के सहयोग से आयोजित होने वाली इस दो दिवसीय प्रदर्शनी में भारतीय सेना अपनी भविष्य की युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन करेगी। यह केवल हथियारों का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि आसियान देशों के सामने ‘मेक इन इंडिया’ की सफलता की कहानी पेश करना है।
• रोबोटिक्स और AI: रसद पहुंचाने के लिए ‘रोबोटिक खच्चर’ (Robotic Mules) और टोही मिशन के लिए मानवरहित जमीनी वाहन (UGV)।
• ड्रोन वारफेयर: मानवरहित हवाई प्रणालियां और उन्हें बेअसर करने वाले काउंटर-ड्रोन सिस्टम।
• साइबर डिफेंस: आधुनिक युग की सबसे बड़ी चुनौती यानी साइबर हमलों से निपटने की तकनीक।
• स्मार्ट सर्विलांस: जमीन, हवा और पानी के भीतर सटीक निगरानी करने वाले इंटेलिजेंस सिस्टम।
इन उपकरणों का सबसे बड़ा फायदा यह है कि विदेशी सेनाएं अभ्यास के दौरान इनका इस्तेमाल करेंगी, जिससे उन्हें भारतीय हार्डवेयर की गुणवत्ता का वास्तविक अनुभव मिलेगा।
सिर्फ सेना नहीं, बल्कि एक संयुक्त सुरक्षा तंत्र
‘प्रगति’ अभ्यास की एक और बड़ी खासियत इसकी व्यापकता है। इसमें न केवल थल सेना, बल्कि भारतीय वायुसेना और नौसेना के प्रतिनिधि भी हिस्सा लेंगे। इतना ही नहीं, भारत की सीमाओं की रक्षा करने वाले बल (BSF) और राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों को भी इस आयोजन में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य एक ऐसा एकीकृत सुरक्षा ढांचा तैयार करना है, जो भविष्य की किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहे।
इस अभ्यास में मानवीय उत्तरजीविता (Human Survivability) से जुड़े आधुनिक समाधानों, जैसे कि विशेष पैराशूट, मल्टीस्पेक्ट्रल कैमलाउज नेट और उन्नत चिकित्सा उपकरणों का भी प्रदर्शन किया जाएगा।
सैन्य कूटनीति का नया भविष्य
भारत लंबे समय से द्विपक्षीय सैन्य अभ्यास करता आया है, लेकिन ‘प्रगति’ जैसे बहुपक्षीय आयोजन यह साबित करते हैं कि भारत अब रक्षा के क्षेत्र में एक ‘नेट सिक्योरिटी प्रोवाइडर’ और ‘मैन्युफैक्चरिंग हब’ के रूप में उभर चुका है। 18 मई से शुरू होने वाला यह 14 दिवसीय अभ्यास न केवल उमरोई के जंगलों में गूंजेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सामरिक धाक को भी मजबूत करेगा। यह ‘प्रगति’ केवल नाम नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र के सुरक्षित कल का ब्लूप्रिंट है।

