
नयी दिल्ली: भारत ने वर्ष 2047 तक वैश्विक वस्तु निर्यात में अपनी हिस्सेदारी 2024 के करीब 1.8 प्रतिशत से बढ़ाकर लगभग 10 प्रतिशत करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, निर्यात को बढ़ावा देने के लिए भारत सीमा-शुल्क में छूट और रियायत की कई योजनाओं को जारी रखे हुए है। इसके साथ, ‘विकसित भारत’ दृष्टिकोण के तहत निर्यात प्रोत्साहन को प्रमुखता दी जा रही है, जिससे दीर्घकालिक उच्च आर्थिक वृद्धि को बनाए रखने और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
रिपोर्ट कहती है, ‘‘इस दृष्टिकोण के तहत भारत का लक्ष्य 2024 के करीब 1.8 प्रतिशत से बढ़ाकर 2047 तक वैश्विक वस्तु निर्यात में अपनी हिस्सेदारी लगभग 10 प्रतिशत करना है।’’
भारत की व्यापार नीतियों और प्रक्रियाओं की आठवीं समीक्षा बैठक जिनेवा में आयोजित हो रही है, जिसमें वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल हिस्सा ले रहे हैं। यह समीक्षा डब्ल्यूटीओ सचिवालय और भारत सरकार की रिपोर्ट पर आधारित है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि डब्ल्यूटीओ सुधारों को लेकर भारत का दृष्टिकोण विकास-केंद्रित, सर्वसम्मति आधारित और सदस्य-प्रेरित होना चाहिए।
भारत ने समीक्षा बैठकों के दौरान संयुक्त वक्तव्य पहल को लेकर भी कई बार अपनी चिंताएं जताई हैं और इनका समर्थन नहीं किया है।
इसके अलावा, भारत ने 2025-26 के बजट में बुनियादी शुल्क ढांचे में बदलाव करते हुए 100, 125 और 150 प्रतिशत जैसी उच्च दरों को समाप्त कर दिया है और औद्योगिक वस्तुओं पर दरों की संख्या घटाकर आठ कर दी है।

