ईरान का अमेरिका को अल्टीमेटम, ‘एक फोन कॉल’ से रुक सकता है इजराइल का हमला

News Aroma Media
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Iran and Israel War: ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीर-अब्दुल्लाहियान ने कहा है कि अमेरिका सिर्फ ‘एक फोन कॉल’ से इजराइल के हमलों को रोक सकता है। समाचार एजेंसी AFP ने सोमवार को यह जानकारी दी।

रॉयटर्स के हवाले से पता चला कि ईरान ने कतर, सऊदी अरब और ओमान से अपील की है कि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से बात करें और इजराइल पर तत्काल संघर्षविराम के लिए दबाव डालें। बदले में, ईरान परमाणु वार्ता में लचीलापन दिखाने को तैयार है।

खाड़ी देशों की डिप्लोमेसी

पिछले सप्ताहांत खाड़ी देशों के नेता और राजनयिक टेलीफोन पर सक्रिय रहे, जो तेहरान, वॉशिंगटन और अन्य देशों से बातचीत कर इजराइल-ईरान तनाव को कम करने की कोशिश में जुटे हैं।

यह दोनों देशों के बीच हाल का सबसे बड़ा संघर्ष है। एक ईरानी सूत्र ने कहा कि संघर्षविराम होने पर ईरान परमाणु वार्ता में रियायत देने को तैयार है। खाड़ी देशों के एक सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि इस संघर्ष के अनियंत्रित होने की गहरी चिंता है।

अमेरिका पर दबाव

कतर, ओमान और सऊदी अरब ने अमेरिका से इजराइल पर दबाव डालने की मांग की है ताकि संघर्षविराम हो और परमाणु वार्ता फिर शुरू हो सके। व्हाइट हाउस और अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।

ईरान-इजराइल में तनाव चरम पर

सोमवार तड़के ईरान ने इजराइल पर मिसाइलें दागीं, जिसमें आठ लोगों की मौत हो गई। जवाब में, इजराइल ने तेहरान के कुछ हिस्सों में रहने वालों को नए हमलों से पहले क्षेत्र खाली करने की चेतावनी दी।

इजराइली सेना ने दावा किया कि उसने तेहरान के ऊपर हवाई नियंत्रण हासिल कर लिया है और अब बिना किसी बड़े खतरे के वहां उड़ान भर सकती है।

इजराइल का दावा

इजराइली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफरीन ने कहा कि उन्होंने तेहरान के आसमान पर पूरी हवाई बढ़त हासिल कर ली है। सेना ने मध्य ईरान में 120 से ज्यादा सतह से सतह पर मार करने वाले मिसाइल लॉन्चर नष्ट किए, जो ईरान की कुल क्षमता का एक-तिहाई है।

साथ ही, इजराइली लड़ाकू विमानों ने ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड की कुद्स फोर्स के 10 कमांड सेंटरों पर हमला किया, जो विदेशों में सैन्य और खुफिया अभियान चलाती है।

क्या होगा आगे?

खाड़ी देशों की मध्यस्थता और ईरान के परमाणु वार्ता में लचीलापन दिखाने के संकेत से तनाव कम होने की उम्मीद है, लेकिन इजराइल के सख्त रुख और अमेरिका की चुप्पी स्थिति को जटिल बना रही है।

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