
कलयुग हो या त्रेतायुग, हर वक्त, हर मोड़ पर एक जामवंत जैसा शख़्स चाहिए, जो हनुमान की तरह सामने वाले को उड़ने के लिए प्रेरित करे। सही दिशा दिखाए। असल में जीवन में लोग असफलता और सफलता को लेकर भ्रम में रहते हैं। लेकिन सफलता की यात्रा कभी भी कहीं से भी शुरू हो सकती है। परिवर्तन कहीं भी किसी भी दिशा में हो सकता है। इसलिए सफलता की यात्रा में कभी भी जामवंत जैसे मोटीवेटर या प्रेरक का उल्लेख जरूर होता है। जामवंत की भूमिका में कोई भी हो सकता है, आपका सहकर्मी, पिता, भाई, बहन या कोई अनजान शख्स।
कई लोग सोचते हैं कि उनकी सफलता स्वयं या खुद के परिश्रम की बदौलत है। जबकि उनकी सफलता के पीछे माहौल, दूसरों के योगदान और प्रेरणा की भी आवश्यकता होती है। खास कर जामवंत जैसे उस शख्स की सबसे ज्यादा, जो आंतरिक शक्ति का अहसास कराता है। हर व्यक्ति को अपने आसपास ऐसे लोगों की अहमियत को स्वीकार करना चाहिए। ऐसे शख़्स कम ही होते हैं। सफलता चाहिए, तो जामवंत सरीखे प्रेरित करनेवाले व्यक्ति को सम्मान दीजिए।
वैसे भी जीवन एक लंबी यात्रा है। इस यात्रा में परिवार, पद से ज्यादा सम्मान का भाव होना चाहिए। मुझे हनुमान जैसी सफलता की कामना रहती है, जो सफलता के शिखर पर होकर भी, राम के प्रिय होने पर भी विनम्रता की प्रतिमूर्ति बने रहे। उनके जैसा सम्मान प्रभु के दरबार में किसी दूसरे को नहीं। लेकिन उनकी इस यात्रा तक जामवंत की भूमिका को भी नकारा नहीं जा सकता। जिनकी एक प्रेरणा से वह समुद्र लांघ गए। लंका दहन कर डाला और अपने असीमित बल को जान पाए।
अपने आसपास अपने जामवंत को ढूंढिए।

