
- लाखों खर्च के बाद भी गांव अंधेरे में, सोलर सिस्टम बना शोपीस
- ग्रामीणों का सवाल—योजना लगी, फिर देखरेख की जिम्मेदारी किसकी?
महुआडांड़: ओरसा पंचायत के जामडीह गांव में ग्रामीणों को रोशन करने के लिए जरेडा की ओर से लगाया गया सोलर बिजली सिस्टम अब सरकारी योजनाओं की हकीकत पर सवाल खड़ा कर रहा है। लाखों रुपये की लागत से लगाए गए सोलर पैनल और उपकरण गांव में मौजूद हैं, लेकिन बिजली की रोशनी गायब है। सिस्टम खराब होने के बाद ग्रामीणों को फिर पुराने अंधेरे का सामना करना पड़ रहा है।
खंभे-पैनल मौजूद, बिजली नदारद
गांव में सोलर सिस्टम के खंभे और पैनल तो नजर आते हैं, लेकिन घरों तक रोशनी नहीं पहुंच रही। ग्रामीणों का कहना है कि योजना शुरू होने के बाद कुछ समय तक बिजली मिली, लेकिन खराबी आने के बाद सिस्टम की सुध लेने वाला कोई नहीं है।
अंधेरे में बच्चों का भविष्य
बिजली नहीं रहने का सबसे बड़ा असर बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा है। शाम होते ही गांव में अंधेरा छा जाता है। ग्रामीणों को मोबाइल चार्ज करने से लेकर रोजमर्रा के जरूरी कामों तक के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है।
ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश
ग्रामीणों ने जरेडा और जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, खराब सोलर सिस्टम को तत्काल दुरुस्त कराने और नियमित रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।

