जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के जर्जर भवनों की बदलेगी सूरत, 19 करोड़ का पुराना प्रस्ताव खारिज

जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के जर्जर भवनों की मरम्मत के लिए 19 करोड़ रुपये का प्रस्ताव नए सिरे से तैयार होगा। पहले जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।

Archana Ekka
3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

जमशेदपुर : जमशेदपुर वीमेंस यूनिवर्सिटी के बिष्टुपुर कैंपस की जर्जर इमारतों की मरम्मत का रास्ता अब साफ होता दिख रहा है। करीब दो साल पहले तैयार किया गया 19 करोड़ रुपये का पुराना मरम्मत प्रस्ताव अब नए सिरे से तैयार किया जाएगा। उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने विश्वविद्यालय प्रबंधन को तत्काल जरूरत वाले भवनों और हिस्सों की प्राथमिकता तय कर नया प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया है।

शनिवार को प्रधान सचिव राहुल पुरवार ने विश्वविद्यालय के बिष्टुपुर कैंपस का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कुलपति डॉ. इला कुमार से कहा कि सभी मरम्मत कार्यों को एक साथ शामिल करने के बजाय सबसे जरूरी कार्यों को प्राथमिकता दी जाए। पहले उन भवनों और हिस्सों की मरम्मत का प्रस्ताव तैयार किया जाए, जहां तत्काल काम कराने की आवश्यकता है। विभाग की ओर से इसी आधार पर मरम्मत कार्य जल्द शुरू कराने की पहल की जाएगी।

विश्वविद्यालय में छात्रावासों में सीपेज की समस्या, क्लासरूम की खराब छतों और स्टाफ क्वार्टर की मरम्मत जैसे कार्य लंबे समय से लंबित हैं। इन समस्याओं को देखते हुए अब नए सिरे से मरम्मत योजना तैयार करने की तैयारी है। निरीक्षण के बाद प्रधान सचिव ने कुलपति और शिक्षकों के साथ बैठक की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल नियमित कक्षाएं संचालित करना नहीं होना चाहिए, बल्कि छात्राओं को भविष्य की चुनौतियों और रोजगार के अवसरों के लिए तैयार करना भी जरूरी है। उपलब्ध संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करते हुए पढ़ाई की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने का निर्देश दिया गया।

राहुल पुरवार ने विश्वविद्यालय में जॉब ओरिएंटेड सर्टिफिकेट कोर्स शुरू करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि उद्योगों की वर्तमान जरूरतों को ध्यान में रखकर पाठ्यक्रम तैयार किए जाने चाहिए, ताकि पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्राओं को रोजगार पाने में आसानी हो। इसके साथ ही विश्वविद्यालय को अपनी आय के स्रोत विकसित करने और शिक्षकों को शोध कार्यों के लिए प्रोत्साहित करने पर भी जोर दिया गया।

छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रधान सचिव ने लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (LMS) के इस्तेमाल पर जोर दिया। उन्होंने शिक्षकों को ऑनलाइन टीचिंग मटेरियल तैयार करने का निर्देश दिया, ताकि किसी कारणवश कक्षा में उपस्थित नहीं हो पाने वाली और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाली छात्राएं भी घर बैठे अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
बैठक में विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी का मुद्दा भी उठा। प्रधान सचिव ने बताया कि शिक्षकों की नियुक्ति के लिए विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रबंधन को पुनर्गठन के आधार पर रोस्टर क्लियर कर नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया, ताकि आगे की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू की जा सके।

Share This Article
अर्चना एक्का को पत्रकारिता का दो वर्ष का अनुभव है। उन्होंने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत इंटर्नशिप से की। इस दौरान उन्होंने झारखंड उजाला, सन्मार्ग और इम्पैक्ट नेक्सस जैसे मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में उन्होंने रिपोर्टर, एंकर और कंटेंट राइटर के रूप में कार्य करते हुए न्यूज़ रिपोर्टिंग, एंकरिंग और कंटेंट लेखन का अनुभव प्राप्त किया। पत्रकारिता के क्षेत्र में वह सक्रिय रूप से काम करते हुए अपने अनुभव को लगातार आगे बढ़ा रही हैं।