रांची: राजधानी के डोरंडा स्थित जैप-1 ग्राउंड में दुर्गा पूजा की परंपरा बेहद अनोखी और ऐतिहासिक रही है, जहां आज त्रयोदशी के अवसर पर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया गया। आमतौर पर विजया दशमी के दिन मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है, वहीं जैप-1 में नेपाली गोरखा रेजिमेंट और सैन्य परंपराओं से जुड़ी रीति के तहत त्रयोदशी के दिन विसर्जन करने की परंपरा लंबे समय से चली आ रही है।

इस दौरान बड़ी संख्या में जवान और उनके परिवार के सदस्य मौजूद रहे। विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना कर मां दुर्गा को विदाई दी गई। विसर्जन से पहले मां दुर्गा के विभिन्न स्वरूपों को सशस्त्र बलों द्वारा फायरिंग कर गार्ड ऑफ ऑनर यानी सलामी दी गई। इसके बाद मां दुर्गा और भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की गई और गंगा का आह्वान करते हुए प्रतिमा का विसर्जन संपन्न हुआ।
जैप-1 के पुजारी सदेव उपाध्याय ने बताया कि विजया दशमी के दिन जवान अपने-अपने घरों में तिलक-पानी की रस्म निभाते हैं और अपने परिवार के साथ त्योहार मनाते हैं। जवानों की इसी पारिवारिक और सैन्य परंपरा को ध्यान में रखते हुए जैप परिसर में मां दुर्गा की विसर्जन का कार्यक्रम त्रयोदशी के दिन आयोजित किया जाता है। उन्होंने बताया कि विसर्जन के दौरान भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा के साथ-साथ नौ देवियों के नाम का उच्चारण कर फायरिंग के माध्यम से मां को अंतिम विदाई दी जाती है।


