झारखंड हाई कोर्ट ने रांची के बड़ा तालाब और हरमू नदी की सफाई पर राज्य सरकार से मांगा जवाब

रांची के जल स्रोतों पर अतिक्रमण और उनकी साफ-सफाई से संबंधित एक समाचार को झारखंड हाई कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील किया था। पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी जिलों के जल स्रोतों की स्थिति, अतिक्रमण और संरक्षण के उपायों पर अद्यतन जानकारी देने का निर्देश दिया था।

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Jharkhand High Court seeks response: झारखंड हाई कोर्ट ने रांची के बड़ा तालाब, हरमू नदी और अन्य जल स्रोतों की साफ-सफाई व संरक्षण के मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए बुधवार को सुनवाई की।

चीफ जस्टिस M.S रामचंद्र राव की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने राज्य सरकार से बड़ा तालाब और हरमू नदी की सफाई पर विस्तृत जवाब मांगा।

कोर्ट ने रांची नगर निगम को हरमू नदी की सफाई से संबंधित दावों को शपथ पत्र के रूप में दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 9 जून 2025 को होगी।

रांची नगर निगम का दावा

निगम की ओर से अधिवक्ता एलसीएन शाहदेव ने बताया कि 10-11 अप्रैल को हरमू नदी की सफाई कराई गई। निगम समय-समय पर सफाई कार्य करता रहता है। इस दावे के समर्थन में हरमू नदी की सफाई के फोटोग्राफ भी कोर्ट में प्रस्तुत किए गए। कोर्ट ने इन दावों को शपथ पत्र के जरिए दाखिल करने का आदेश दिया।

बड़ा तालाब की समस्या

हस्तक्षेपकर्ता झारखंड सिविल सोसायटी की अधिवक्ता खुशबू कटारुका ने कोर्ट को बताया कि बड़ा तालाब की गहराई में जमा गाद नहीं हटाए जाने तक इसकी पूरी सफाई संभव नहीं है। हरमू नदी में भी घरेलू ठोस कचरे का प्रवाह बना हुआ है, जिसे रोकने की जरूरत है।

सरकार ने बताया कि बड़ा तालाब से गाद हटाने के लिए नगर विकास विभाग ने झारखंड अर्बन डेवलपमेंट कंपनी (JUDCO) से संपर्क किया था, लेकिन JUDCO ने विशेषज्ञता की कमी का हवाला देकर असमर्थता जताई। इसके बाद जल संसाधन विभाग को इस संबंध में पत्र लिखा गया है। कोर्ट ने सरकार से इस पर जवाब मांगा।

सरकार ने कोर्ट को सूचित किया कि जल स्रोतों से अतिक्रमण हटाने के लिए गठित टास्क फोर्स की रिपोर्ट अभी पूरी नहीं हुई है। कुछ जिलों से रिपोर्ट आना बाकी है।

रांची के जल स्रोतों पर अतिक्रमण और उनकी साफ-सफाई से संबंधित एक समाचार को झारखंड हाई कोर्ट ने गंभीरता से लेते हुए इसे जनहित याचिका में तब्दील किया था।

पूर्व में कोर्ट ने राज्य सरकार को सभी जिलों के जल स्रोतों की स्थिति, अतिक्रमण और संरक्षण के उपायों पर अद्यतन जानकारी देने का निर्देश दिया था।

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