झारखंड के 100 साल से अधिक पुराने शिक्षण संस्थान बनेंगे ‘हेरिटेज’, दस्तावेजों और दुर्लभ किताबों का होगा डिजिटाइजेशन

झारखंड के 100 साल से पुराने स्कूल-कॉलेजों को हेरिटेज पहचान देने की पहल शुरू हुई है। केंद्र सरकार इनके ऐतिहासिक दस्तावेज, इमारतें और शैक्षणिक विरासत संरक्षित करेगी।

3 Min Read
WhatsApp Group Join Now
Instagram Follow Now

रांची: झारखंड के ऐतिहासिक और 100 साल से भी अधिक पुराने सरकारी स्कूलों व कॉलेजों को अब ‘हेरिटेज’ (विरासत) के रूप में नई पहचान मिलने जा रही है। प्रधानमंत्री कार्यालय के विशेष निर्देशों के बाद केंद्र सरकार ने इन शैक्षणिक धरोहरों को संरक्षित करने के लिए एक व्यापक पहल शुरू की है, जिसके तहत राज्यभर से सदी पुराने संस्थानों के आंकड़े और विस्तृत जानकारियां जुटाई जा रही हैं।

केंद्र सरकार के निर्देश पर सभी जिलों से ऐसे प्राचीन शिक्षण संस्थानों की विस्तृत सूची तैयार की जा रही है। इसके लिए सभी जिलों के प्रशासनिक और शिक्षा अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं। शिक्षा विभाग द्वारा सभी संबंधित स्कूलों से एक निर्धारित प्रारूप में विवरण मांगा गया है, जिसमें स्कूल का नाम, पूरा पता, यू-डाइस कोड, स्थापना का वर्ष, लैंड ग्रेडिंग और पत्राचार का पता जैसी तमाम जानकारियां शामिल हैं।

ऐतिहासिक महत्व और संरक्षण के मायने

केंद्र सरकार का मानना है कि ये प्राचीन शैक्षणिक संस्थान केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं रहे, बल्कि भारत के ऐतिहासिक शैक्षणिक संघर्ष, स्वतंत्रता संग्राम और अनेक सामाजिक बदलावों के जीवंत गवाह रहे हैं। इन संस्थानों से देश के कई महान विभूतियाँ, स्वतंत्रता सेनानी और समाज सुधारक जुड़े रहे हैं, इसलिए सरकार इनके समृद्ध इतिहास का आधिकारिक दस्तावेजीकरण करना चाहती है। 100 से अधिक वर्ष पुराने होने के कारण इनमें से अधिकतर स्कूल और कॉलेज जर्जर स्थिति में पहुंच चुके हैं, इसलिए इस योजना के माध्यम से इनके भवनों और ऐतिहासिक स्वरूप को सहेजा जाएगा।

हेरिटेज के रूप में मिलने वाले प्रमुख फायदे

संस्थानों के ऐतिहासिक दस्तावेज, दुर्लभ पुस्तकें, तस्वीरें और शैक्षणिक योगदान से जुड़ी जानकारियों को डिजिटल रूप में सुरक्षित किया जाएगा। जो इमारतें जर्जर हो चुकी हैं, उनका पुरातत्व नियमों के अनुसार जीर्णोद्धार कर उनकी मूल वास्तु कला को सुरक्षित रखा जाएगा। पुरातत्व विशेषज्ञों या विभाग की मदद से इन संस्थानों के मूल स्वरूप को नुकसान पहुँचाए बिना इनका जीर्णोद्धार किया जाएगा तथा विशेष रखरखाव, कंप्यूटर व अन्य बुनियादी सुविधाओं के लिए अलग से फंड उपलब्ध कराया जाएगा। छात्र-छात्राओं को आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के साथ-साथ अन्य स्कूलों के कोर्स के माध्यम से भी इस विरासत के बारे में पढ़ाया जाएगा।

Share This Article
विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।