
रांची : शुक्रवार को रांची विश्वविद्यालय की प्रो.वंदना और प्रो.सुधांशु द्वारासंयुक्त रूप से लिखित पुस्तक वाइल्ड लीफी वेजिटेबल्स एंड फ्लावर्स (नेचर्स पोटेंट डायटरी सप्लीमेंट्स) का लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने पुस्तक का विमोचन करते हुए लेखकों को बधाई दी और इसे जनजातीय ज्ञान, जैव विविधता और पोषण से जुड़ा महत्वपूर्ण दस्तावेज बताया।
कार्यक्रम में राज्यपाल ने कहा कि झारखंड के ग्रामीण और विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में सैकड़ों प्रकार के साग, पत्ते और जंगली फूल पारंपरिक रूप से भोजन में उपयोग किए जाते रहे हैं। ये प्राकृतिक खाद्य पदार्थ न केवल सस्ते और सुलभ हैं, बल्कि औषधीय गुणों से भी भरपूर हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि महिलाओं और बच्चों में कुपोषण की समस्या के समाधान में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध इन पौष्टिक वनस्पतियों की महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पारंपरिक भोजन प्रणाली में मौजूद यह ज्ञान अब वैज्ञानिक शोध के साथ जोड़कर आगे बढ़ाने की जरूरत है, ताकि इन प्राकृतिक संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और पोषण सुरक्षा को मजबूत किया जा सके।
पुस्तक के बारे में जानकारी
यह पुस्तक झारखंड, विशेषकर जनजातीय क्षेत्रों में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकार के साग-सब्जियों, पत्तियों और फूलों पर आधारित वैज्ञानिक अध्ययन का परिणाम है। इसमें 250 से अधिक प्रजातियों का विस्तृत विवरण चित्रों सहित दिया गया है। पुस्तक को दो दशकों से अधिक के शोध और फील्ड स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है, जिसमें ग्रामीण हाट बाजारों और जंगलों में मिलने वाले पौधों के उपयोग, पोषण मूल्य और औषधीय गुणों का विश्लेषण किया गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, झारखंड की जनजातीय परंपराओं में पाए जाने वाले ये जंगली साग न केवल खाद्य सुरक्षा में योगदान देते हैं, बल्कि एंटीऑक्सीडेंट, विटामिन और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी हैं। कई शोधों में यह भी सामने आया है कि ऐसे पारंपरिक वनस्पति संसाधनों का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पोषण सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
महत्व
यह पुस्तक न केवल वनस्पति विज्ञान और शोधकर्ताओं के लिए उपयोगी है, बल्कि ग्रामीण विकास, पोषण नीति और जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री मानी जा रही है।

