झारखंड में जन्मजात हृदय रोग से पीड़ित बच्चों की पहचान और उपचार के लिए स्वास्थ्य विभाग ने ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम शुरू किया है। रिम्स, रांची के ऑडिटोरियम में स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने इस अभियान का शुभारंभ किया। स्वास्थ्य विभाग और अमृता हॉस्पिटल, कोच्चि के संयुक्त प्रयास से आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न जिलों से पहुंचे करीब 380 बच्चों की स्क्रीनिंग की गई।

क्या है जन्मजात हृदय रोग?
जन्मजात हृदय रोग ऐसी स्थिति है, जिसमें बच्चे के दिल की बनावट में जन्म से ही कोई असामान्यता होती है। यह हृदय की दीवार, वाल्व या प्रमुख रक्त वाहिकाओं से जुड़ी हो सकती है। इसके प्रमुख प्रकारों में वेंट्रिकुलर सेप्टल डिफेक्ट (VSD), एट्रियल सेप्टल डिफेक्ट (ASD) और पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसस (PDA) शामिल हैं। बीमारी की गंभीरता के अनुसार उपचार तय किया जाता है।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बच्चों में जन्मजात हृदय रोग के लक्षण उम्र और बीमारी की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ प्रमुख संकेत इस प्रकार हैं:
- दूध पीते समय जल्दी थक जाना या बार-बार रुकना।
- दूध पीते समय तेज सांस चलना या अधिक पसीना आना।
- उम्र के अनुसार वजन नहीं बढ़ना।
- होंठ या जीभ का नीला पड़ना।
- बार-बार निमोनिया या छाती में संक्रमण होना।
- सांस लेने में परेशानी या दिल की धड़कन तेज होना।
- सामान्य गतिविधियों में भी अत्यधिक थकान होना।
इन लक्षणों के आधार पर खुद बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। चिकित्सक की सलाह से जरूरी जांच कराना आवश्यक है। सांस लेने में गंभीर परेशानी या होंठ-जीभ नीले पड़ने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
हर बच्चे को ऑपरेशन की जरूरत नहीं
जन्मजात हृदय रोग का पता चलने का मतलब यह नहीं है कि हर बच्चे की सर्जरी करनी पड़ेगी। कुछ मामलों में छोटे छेद समय के साथ अपने आप बंद हो सकते हैं, जबकि कुछ बच्चों को दवाओं और नियमित निगरानी की जरूरत होती है। गंभीर स्थिति में कैथेटर आधारित उपचार या सर्जरी की सलाह दी जा सकती है।
बीमारी की पहचान के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार 2D इकोकार्डियोग्राफी, कलर डॉप्लर, ईसीजी और पल्स ऑक्सीमेट्री जैसी जांच करा सकते हैं।
गरीब बच्चों के इलाज का खर्च उठाएगी सरकार
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने कहा कि आर्थिक तंगी के कारण किसी बच्चे का इलाज नहीं रुकना चाहिए। ‘गिफ्ट ऑफ लाइफ’ कार्यक्रम के तहत स्क्रीनिंग के बाद जिन बच्चों में जन्मजात हृदय रोग की पुष्टि होगी, उन्हें आगे की जांच और उपचार के लिए चयनित किया जाएगा।
मंत्री ने जरूरत के अनुसार पांच से 10 लाख रुपये और गंभीर मामलों में 10 से 15 लाख रुपये तक के इलाज खर्च की व्यवस्था करने की जानकारी दी। वास्तविक खर्च बच्चे की बीमारी और उपचार की जरूरत पर निर्भर करेगा।
समय पर पहचान से बेहतर हो सकता है इलाज
जन्मजात हृदय रोग के कई मामलों में समय पर पहचान और उचित उपचार से बच्चों की स्थिति में सुधार संभव है। इस अभियान का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को विशेषज्ञ जांच और जरूरी उपचार उपलब्ध कराना है। स्वास्थ्य मंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों में सांस लेने में परेशानी, दूध पीने में कठिनाई, वजन नहीं बढ़ने या बार-बार छाती में संक्रमण जैसे लक्षण दिखें तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।


