जर्जर भवन में पढ़ाई करने को मजबूर झारखंड के छात्र, हादसे का बना रहता है डर

झारखंड के हजारों सरकारी स्कूलों के जर्जर भवनों में पढ़ाई कर रहे बच्चों की सुरक्षा खतरे में है, जबकि सरकार ने कई इमारतें ध्वस्त कर नए कक्ष बनाने की तैयारी शुरू की।

News Aroma
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रांची: झारखंड के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों नौनिहालों का भविष्य और जीवन जर्जर भवनों के कारण लगातार खतरे में बना हुआ है। राज्य भर में कई सरकारी स्कूल ऐसे जर्जर और असुरक्षित इमारतों में चल रहे हैं, जहां दरकी हुई दीवारें, टपकती छतें और उखड़ी हुई छड़ें हादसों को न्योता दे रही हैं। इस खराब बुनियादी ढांचे का सीधा असर बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।
राजधानी रांची के हेथू गांव स्थित उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय की स्थिति इसका उदाहरण है। 1959 में बनी इस पुरानी इमारत में आज भी 90 से अधिक बच्चे पढ़ने आते हैं। बारिश के दिनों में छत से पानी टपकता है और छज्जों से लोहे की सरिया साफ नजर आती है। ऐसी ही स्थिति कई अन्य स्कूलों की भी है। थड़पखना के सरकारी मध्य विद्यालय में खराब हालत के कारण सिर्फ नौ बच्चे ही रह गए हैं, जबकि लालपुर का सरकारी मध्य विद्यालय मुख्य इमारत जर्जर होने की वजह से नगर निगम के भवन से संचालित हो रहा है।
यू-डाइज (UDISE+) डेटाबेस के अनुसार राज्य में 35,000 से अधिक स्कूल हैं। शिक्षा विभाग के हालिया बेसलाइन सर्वे के अनुसार इनमें से करीब 4,481 सरकारी स्कूल भवन बेहद जर्जर और असुरक्षित पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने इनमें से 3,428 अत्यंत जर्जर संरचनाओं को ध्वस्त करने का निर्णय लिया है।
अपर जिला कार्यक्रम अधिकारी पंकज कुमार के अनुसार, हर साल मरम्मत योग्य स्कूलों की एक सूची तैयार कर सरकार को बजट के लिए भेजी जाती है। हालांकि, प्रस्ताव में शामिल सभी स्कूलों को मरम्मत के लिए फंड स्वीकृत नहीं हो पाता और स्वीकृत सूची काफी छोटी रह जाती है। वर्तमान व्यवस्था के तहत स्कूलों को छात्र संख्या के आधार पर वार्षिक रखरखाव अनुदान दिया जाता है। 100 से कम छात्रों वाले स्कूलों को 10,000, 250 तक छात्रों के लिए 25,000, 1,000 तक के लिए 50,000 और 1,000 से अधिक नामांकन वाले स्कूलों को 1 लाख दिए जाते हैं। इस बीच शिक्षा विभाग ने स्थिति में सुधार लाने के उद्देश्य से विभिन्न स्कूलों में 800 से अधिक नए क्लासरूम बनाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है।

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