आदिवासी संस्कृति को बचाने का संकल्प: मंत्री चमरा लिंडा ने सरहुल महोत्सव में दिया संदेश

आदिवासी संस्कृति को बचाने का संकल्प, सरना धर्म की रक्षा के लिए एकजुट हों। पारंपरिक धरोहर को संरक्षित करने का प्रयास, आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत को बचाने का अभियान।"

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Ranchi: झारखंड के आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य के अनुसूचित जाति, जनजाति और पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग के मंत्री चमरा लिंडा ने ऐलान किया है कि सरकार आदिवासी समाज की पारंपरिक धरोहर को बचाने के लिए 15 करोड़ रुपये की राशि से मांदर और नगाड़े वितरित करेगी।

रांची के कांके स्थित मायापुर सरना स्थल में आयोजित 29वें सरहुल पूजा महोत्सव में मंत्री +लिंडा ने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान और परंपराओं के संरक्षण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आदिवासी समाज की धरोहर को बचाना बेहद जरूरी है और सरहुल महोत्सव में पारंपरिक मांदर और नगाड़े की धुनों पर नृत्य किया जाना चाहिए, न कि आधुनिक डीजे और फिल्मी गीतों के जरिए।

सरकार आदिवासी समाज को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है

मंत्री ने कहा कि उनका मंत्रालय आदिवासी समाज के कल्याण के लिए काम कर रहा है और सरकार आदिवासी समाज को शिक्षित और सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। इसके साथ ही, आदिवासी और ओबीसी समुदाय के उत्थान के लिए राज्य सरकार स्कूल, ट्यूशन सेंटर, कॉलेज और अस्पताल खोलने की योजना बना रही है।

सरना धर्म की मान्यता के मुद्दे पर भी मंत्री लिंडा ने अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार सरना कोड नहीं देती है, तो राज्य सरकार आंदोलन करने के लिए तैयार है। मंत्री ने समाज के सभी लोगों से एकजुट होकर इस संघर्ष को समर्थन देने की अपील की।

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