
रांची : नेपाल हाउस स्थित योजना एवं विकास विभाग सभागार में गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की अध्यक्षता में राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मलेरिया, डेंगू, लिम्फेटिक फाइलेरिया, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे रोगों के नियंत्रण और रोकथाम के लिए अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष बल दिया गया। अपर मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि इन बीमारियों पर काबू पाना सिर्फ स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास, शिक्षा, पेयजल-स्वच्छता और श्रम विभाग जैसे सभी संबंधित महकमों को एकजुट होकर काम करना होगा।
उन्होंने निर्देश दिए कि विभिन्न विभागों की जवाबदेही तय करते हुए औपचारिक पत्र जारी किए जाएं और जिला से लेकर पंचायत स्तर तक इसका असरदार क्रियान्वयन सुनिश्चित हो।समीक्षा के दौरान आंकड़ों के हवाले से बताया गया कि जून 2026 तक राज्य में मलेरिया के कुल 16,728 मामले सामने आए हैं, जिनमें अकेले पूर्वी सिंहभूम 6,527 और पश्चिमी सिंहभूम 6,172 जिलों की हिस्सेदारी करीब 76 फीसदी रही है। वहीं जून 2026 में डेंगू के 77 मामले दर्ज किए गए, जिनमें सर्वाधिक 27 मरीज रांची से पाए गए। इन आंकड़ों को देखते हुए अपर मुख्य सचिव ने उच्च जोखिम वाले इलाकों में समय पर जांच, त्वरित और पूर्ण इलाज, पर्याप्त दवाइयों की उपलब्धता, मच्छरों की रोकथाम और जागरूकता अभियानों को गति देने के कड़े निर्देश दिए।
फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर उन्होंने कहा कि ‘सर्वजन दवा सेवन’ (एमडीए) अभियान के तहत सिर्फ दवा बांटना काफी नहीं है, बल्कि प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में दवा का सेवन कराना अनिवार्य है। साथ ही फाइलेरिया मरीजों के लिए रुग्णता प्रबंधन, एमएमडीपी किट वितरण और हाइड्रोसील के उपचार को सुदृढ़ करने पर जोर दिया गया। बैठक में ग्रामसभा, स्कूल-कॉलेज, स्वयं सहायता समूहों और कार्यस्थलों के माध्यम से जलजमाव रोकने, सफाई अभियान चलाने और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर सहमति बनी। इस बैठक में क्षेत्रीय स्वास्थ्य निदेशक रविशंकर, एनएचएम एमडी शशि प्रकाश झा, उप सचिव अश्विनी कुमार समेत कई विभागों के अधिकारी और विश्व स्वास्थ्य संगठन, पीरामल व सिनी जैसी सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

