Jharkhand High Court: त्योहारी मौसम में झारखंड के सरकारी कर्मचारियों के लिए हाईकोर्ट से एक के बाद एक बड़ी खुशखबरी आई है। सिर्फ 10 दिनों के भीतर हाईकोर्ट ने ऐसे 8 अहम फैसले सुनाए हैं, जिनसे किसी को नौकरी मिलने का रास्ता साफ हुआ, तो किसी को प्रमोशन, वरिष्ठता और बकाया मानदेय का हक मिला।
दूसरी बड़ी राहत रिम्स के 28 असिस्टेंट और एसोसिएट प्रोफेसरों को मिली है। कोर्ट ने उन्हें 1 जुलाई 2019 से प्रमोशन और उससे जुड़े लाभ देने का निर्देश दिया है।
तीसरे मामले में दरोगा की वरीयता को लेकर कोर्ट ने साफ कर दिया कि सीधी भर्ती से नियुक्त दरोगा वरीयता सूची में ऊपर रहेंगे।
चौथे फैसले में जल संसाधन विभाग के तीन जूनियर इंजीनियरों को नवंबर 2012 से सहायक अभियंता पद पर प्रमोशन और परिणामी लाभ देने का आदेश दिया गया है।
पांचवां फैसला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। दुमका में चौकीदार भर्ती के दौरान एक दिव्यांग अभ्यर्थी महज तीन सेकंड की देरी से दौड़ में अयोग्य घोषित कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने उसे नियुक्ति का हकदार मानते हुए आठ सप्ताह में नियुक्ति पत्र जारी करने का निर्देश दिया है।
छठे मामले में 2016 की TGT बहाली के 34 शिक्षकों को फरवरी 2019 से काल्पनिक नियुक्ति तिथि, वरिष्ठता और अन्य सेवा लाभ देने का आदेश दिया गया है। हालांकि, बकाया वेतन नहीं मिलेगा।
सातवें फैसले में कल्याण विभाग के 13 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के प्रमोशन का रास्ता साफ हो गया है। कोर्ट ने सरकार को पात्रता सत्यापन के बाद आठ सप्ताह में औपचारिक आदेश जारी करने का निर्देश दिया है।
और आठवें मामले में पलामू के पारा शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश रद्द कर तत्काल बहाली और निर्धारित अवधि का बकाया वेतन या मानदेय देने का निर्देश दिया है।
इन सभी मामलों में हाईकोर्ट के जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने अहम आदेश पारित किए हैं।
यानी किसी की वर्षों पुरानी नौकरी की लड़ाई खत्म हुई, किसी को प्रमोशन मिला तो किसी को अपना खोया हुआ सेवा अधिकार वापस मिला।


