


रांची: झारखंड में एनजीटी की रोक के बावजूद बालू का अवैध कारोबार बदस्तूर जारी है, जिससे राज्य सरकार को हर साल करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है। खनन विभाग की रिपोर्ट के अनुसार नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) द्वारा 10 जून से 15 अक्टूबर तक बालू खनन पर लगाई गई रोक के बावजूद राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर बालू का अवैध उठाव हो रहा है। रांची, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां जैसे जिलों में कुल 440 स्वीकृत बालू घाटों में से मात्र 14 घाट ही चालू हैं, जबकि बाकी सभी बंद हैं। इसके बावजूद इन इलाकों से रोजाना सैकड़ों ट्रक और हाइवा अवैध रूप से बालू उठाकर ऊंचे दामों पर बेच रहे हैं।





जिला सर्वेक्षण रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, इस अवैध खनन और तस्करी के कारण राज्य को हर साल लगभग ₹5,937 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। विधानसभा की आंतरिक संसाधन समिति की रिपोर्ट का अनुमान है कि सरकार को केवल बालू से ही सालाना ₹4,500 करोड़ तक का राजस्व मिल सकता है, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही और सांठगांठ के कारण यह राशि माफियाओं की जेब में जा रही है।
प्रशासन की ओर से समय-समय पर अवैध बालू के खिलाफ छापेमारी अभियान चलाकर वाहन जब्त किए जाते हैं और प्राथमिकी भी दर्ज की जाती है, लेकिन यह कार्रवाई इस विशाल अवैध कारोबार को रोकने में नाकाफी साबित हो रही है। रोक के दौरान बालू की कृत्रिम किल्लत पैदा कर इसे मनमाने दामों पर बेचा जा रहा है, जिससे आम जनता को भारी वित्तीय संकट का सामना करना पड़ रहा है।
