सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद झारखंड को केंद्र से मिलेंगे बकाया 1.36 लाख करोड़

खदानों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने स्वागत किया है

News Aroma
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Supreme Court’s decision : खदानों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने के राज्यों के अधिकार पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले का झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन (Hemant Soren) ने स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि इस फैसले के बाद झारखंड को केंद्र से बकाया एक लाख 36 हजार करोड़ रुपए मिलने की राह प्रशस्त हो गई है।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस DY Chandrachud की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय संविधान पीठ ने खनिज संपन्न राज्यों को बड़ी राहत दी है। संविधान पीठ ने राज्यों को खनिजों और खनिज-युक्त भूमि पर केंद्र सरकार से बकाया रॉयल्टी और टैक्स लेने की अनुमति दी है।

राज्य एक अप्रैल 2005 की तारीख से केंद्र के पास बकाया राशि 12 वर्ष में क्रमबद्ध तरीके से प्राप्त कर सकेंगे। इससे पहले 25 जुलाई को संविधान पीठ ने 8-1 के बहुमत से दिए अपने फैसले में खदानों तथा खनिज-युक्त भूमि पर कर लगाने का विधायी अधिकार राज्यों को दिया था।

झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन ने इस फैसले को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा है, ‘ बड़ी जीत! माननीय सुप्रीम कोर्ट का आभार। Supreme Court के आज के ऐतिहासिक फैसले से हमारी लगातार मांग सफल हुई है। अब झारखंड को केंद्र से मिलेंगे अपने बकाये के 1 लाख 36 हज़ार करोड़ रुपये! हर झारखंडी के इस बकाये/अधिकार को लेकर आपकी अबुआ (अपनी) सरकार लगातार आवाज बुलंद कर रही थी।’

सोरेन ने आगे लिखा है, ‘ अब हमें 2005 से खनिज रॉयल्टी का बकाया मिलेगा। यह भुगतान 12 साल में चरणबद्ध तरीके से होगा। राज्यवासियों के हक सुरक्षित होने के साथ इन पैसों का उपयोग जन-कल्याण में होगा, और हर झारखंडवासी को इसका पूरा लाभ मिलेगा!’

झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री बन्ना गुप्ता ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक बताया है।

उन्होंने social media पर लिखा, ‘2005 से झारखंड का बकाया 1 लाख 36 हज़ार करोड़ रुपये देने का निर्देश माननीय सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिया है। आज इस ऐतिहासिक फैसला को सुनाने के लिए माननीय सुप्रीम कोर्ट का राज्य की जनता के तरफ से आभार और धन्यवाद! यह पैसा झारखंड को खनिज रॉयल्टी के बकाये के तौर पर मिलेगा जिससे राज्य के विकास में नये आयाम लिखे जायेंगे और झारखंड विकास की ओर अग्रसर होगा! जय संविधान! जय झारखंड!’

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