
Jharkhand News: धनबाद के एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) ने शुक्रवार को बोकारो जिले के कसमार प्रखंड कार्यालय में धमाकेदार रेड मारी। यहां दो जूनियर इंजीनियरों को रिश्वत के पैसे लेते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया गया। ये दोनों मनरेगा और 15वें फाइनेंस कमीशन के काम संभाल रहे थे। ACB ने कागजी कार्रवाई पूरी की और फिर दोनों को गिरफ्तार करके धनबाद ले गई।
गिरफ्तार इंजीनियरों के नाम हैं राजीव रंजन और आशीष कुमार। राजीव पलामू जिले के डाल्टनगंज थाना एरिया के सूदना गांव से हैं, जबकि आशीष बोकारो के गोमिया प्रखंड के हजारी गांव का रहने वाला है। दोनों पर रिश्वत लेने का सीधा आरोप है – और ये सब एक गरीब महिला की मनरेगा स्कीम के पैसे रोकने की वजह से हुआ।
क्या है पूरा मामला? एक आम बागवानी योजना में फंस गया रिश्वत का जाल
दरअसल, गर्री पंचायत के बनकनारी गांव में रहने वाले हबीब अंसारी की पत्नी हलीमा खातुन को मनरेगा के तहत आम बागवानी योजना मिली थी। ये 2024 की स्कीम है, जो 5 साल की चलने वाली है। हलीमा ने अपनी एक एकड़ जमीन पर 112 आम के पौधे लगाए – सब कुछ पति के जरिए। योजना में साफ-सफाई, देखभाल और सिंचाई के लिए मजदूर लगाए जाते हैं। हर साल कसमार ब्लॉक से मजदूरी का पैसा आता है।
2024-25 में 11 किस्तों में कुल 1 लाख 38 हजार 688 रुपये का पेमेंट हो चुका था। लेकिन अब 2025-26 का मजदूर पेमेंट का टाइम आया।
हलीमा के साथ चार मजदूर काम कर रहे हैं, और उन्होंने ब्लॉक में डिमांड डाली। लेकिन जूनियर इंजीनियर आशीष कुमार ने साफ कह दिया – “पैसे चाहिए तो 5 हजार रुपये की घूस दो, वरना पेमेंट रुक जाएगा।” पहले भी इसी तरह 2024-25 का पेमेंट रोक दिया था जब घूस नहीं मिली।
हलीमा ने ACB में शिकायत की। टीम ने जांच की, आरोप सही पाए, और FIR दर्ज कर ट्रैप टीम भेज दी। रेड के दौरान आशीष को घूस लेते पकड़ा गया, और राजीव भी साथ में फंस गया। अब दोनों पर PC एक्ट के तहत केस चलेगा।

