
रांची : झारखंड के विभिन्न विभागों और कार्यालयों में कार्यरत लगभग 3 से 4 हजार आउटसोर्स कर्मियों की स्थिति अत्यंत दयनीय एवं चिंताजनक हो चुकी है। जैप-आइटी रांची एवं आउटसोर्स एजेंसियों के बीच हुआ सेवा अनुबंध दिनांक 31 मार्च को समाप्त हो चुका है, लेकिन आज तक न तो उक्त अनुबंध की सेवा अवधि का विस्तार किया गया है और न ही नई निविदा (Tender) प्रक्रिया को पूर्ण किया गया है।
इस प्रशासनिक उदासीनता का सीधा असर उन हजारों कर्मियों पर पड़ा है, जो वर्षों से ईमानदारी पूर्वक अपनी सेवाएं दे रहे हैं। आवंटन के अभाव में जनवरी 2026 से अब तक सभी कर्मियों का वेतन लंबित है। लगातार 4-5 महीनों से बिना वेतन कार्य करने को विवश ये कर्मचारी और उनके परिवार आज गंभीर आर्थिक संकट, मानसिक तनाव एवं भुखमरी जैसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।
विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि झारखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर मुख्य सचिव की अगुवाई में झारखंड राज्य में आउटसोर्स कर्मियों से सेवा प्राप्त करने के लिए “Jharkhand Manpower Procurement (Outsourcing) Manual 2025” का गठन किया गया तथा Finance Department, Government of Jharkhand के पत्रांक 1278 दिनांक 03.06.2025 के माध्यम से इसका संकल्प भी जारी किया गया। परंतु अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि उक्त संकल्प जारी होने के लगभग एक वर्ष बीत जाने के बाद भी इसके आलोक में नई निविदा प्रक्रिया को अंतिम रूप नहीं दिया गया है। परिणामस्वरूप हजारों आउटसोर्स कर्मियों को लगातार आर्थिक, मानसिक एवं सामाजिक क्षति उठानी पड़ रही है।
कई कर्मियों के घरों में राशन की समस्या उत्पन्न हो चुकी है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, इलाज रुक गया है, किराया और बैंक ऋण की किस्तें चुकाना कठिन हो गया है। इसके बावजूद सभी कर्मी पूरी निष्ठा और जिम्मेदारी के साथ सरकारी कार्यों को संचालित कर रहे हैं। यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि डिजिटल झारखंड और ई-गवर्नेंस जैसी महत्वपूर्ण योजनाओं को धरातल पर संचालित करने वाले कर्मियों की पीड़ा को अब तक गंभीरता से नहीं लिया गया है।

