रांची: झारखंड की पंचायतों के विकास को लेकर 15वें वित्त आयोग की अंतिम किस्त मिलने का रास्ता फिलहाल साफ नहीं हो पा रहा है, जिससे राज्य के लगभग 700 करोड़ रुपये फंस गए हैं। इसका सीधा असर गांवों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, यदि अंतिम वर्ष दिसंबर 2025 तक का उपयोगिता प्रमाण पत्र समय पर मिल जाता तो मार्च तक लगभग 700 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त जारी हो जाती। लेकिन कम समय होने के कारण राज्य सरकार समय पर उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं भेज पाई और केंद्र सरकार ने भी इसके बिना ग्रांट ट्रांसफर नहीं किया। प्रमाण पत्र समय से न मिलने के कारण राशि निर्गत नहीं हुई, जिसके बाद राज्य सरकार ने राशि के लिए लिखापढ़ी तो की, लेकिन पैसा नहीं मिला। अब राज्य को 15वें वित्त आयोग की राशि से गांवों में नाली निर्माण, पेयजल, स्वच्छता, जल निकासी, छोटी सड़कों की मरम्मत, स्ट्रीट लाइट सहित अन्य छोटे-छोटे कार्य करवाने थे, जो राशि की कमी के कारण बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।

16वें वित्त आयोग की सिफारिश से होगा समाधान ग्रामीण विकास विभाग के सचिव मनोज कुमार ने जानकारी दी है कि वित्तीय वर्ष में 2700 करोड़ रुपये में से 2000 करोड़ रुपये मिलने की रूपरेखा थी। दिसंबर में राशि मिलनी थी और तीन माह में ही रिपोर्ट देनी थी, मगर देर से सारी प्रक्रिया पूरी होने के कारण राशि की मांग कैट से की गई, पर पैसा नहीं मिला। अब 16वें वित्त आयोग से राशि लेकर कार्य कराया जाएगा। 15वें वित्त आयोग का समय निकल चुका है और अब केंद्र 16वें वित्त आयोग के माध्यम से ही राशि देगा। 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल वर्ष 2021 से 2026 तक था। इस दौरान राज्य की त्रिस्तरीय पंचायतों के विकास के लिए 6585 करोड़ रुपये मिलने थे, जिनमें से दो वर्षों में करीब 2700 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन इसमें 2000 करोड़ रुपये ही मिल पाए। हालांकि, राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री व सचिव ने केंद्र सरकार से आग्रह किया है कि यह राशि झारखंड को दे दी जाए ताकि इसका सदुपयोग हो सके।


