झारखंड के 15 जिलों में स्कूल ड्रॉपआउट ने बढ़ाई चिंता, ये डिस्ट्रिक्ट है टॉप पर

झारखंड के 15 जिलों में स्कूल ड्रॉपआउट हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए हैं। शिक्षा विभाग ने बच्चों को दोबारा स्कूल से जोड़ने के लिए विशेष नामांकन और ट्रैकिंग अभियान शुरू किया है।

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रांची: झारखंड में बच्चों को शिक्षा से जोड़े रखने की राह में बड़ी चुनौती सामने आ गई है। स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने राज्य के 15 जिलों को ‘स्कूल ड्रॉपआउट हॉटस्पॉट’ के रूप में चिन्हित किया है, जहां बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर राज्य के औसत से अधिक है। इस लिस्ट में पाकुड़ जिला सबसे ऊपर है, जहां छह प्रखंडों के 606 स्कूलों में ड्रॉपआउट की स्थिति दर्ज की गई है। इसके बाद दुमका दूसरे स्थान पर है, जहां चार प्रखंडों के 535 स्कूल चिन्हित किए गए हैं, जबकि पलामू तीसरे नंबर पर है जहां पांच प्रखंडों के 427 स्कूल इस दायरे में हैं।

इस स्थिति से निपटने और ड्रॉपआउट बच्चों को मुख्यधारा में वापस लाने के लिए शिक्षा विभाग ने ‘आउट-ऑफ-स्कूल बच्चों का विशेष नामांकन, ट्रैकिंग और जुड़ाव’ पहल के तहत दो महीने का एक विशेष अभियान शुरू किया है। यू-डाइज (U-DISE) 2025-26 के आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर शुरू किया गया यह अभियान 7 जुलाई से 7 सितंबर 2026 तक चलाया जा रहा है। इसके तहत पिछले तीन वर्षों में उच्च ड्रॉपआउट दर, कम छात्र प्रगति और घटते नामांकन वाले 39 उच्च प्राथमिकता वाले प्रखंडों के कुल 3,469 स्कूलों को लक्षित किया गया है।

अन्य प्रभावित जिलों की बात करें तो गोड्डा में 338, पश्चिमी सिंहभूम में 269, देवघर में 231, खूंटी में 203, गिरिडीह में 171, गुमला में 157, साहिबगंज में 154, रांची में 112, धनबाद में 99, लोहरदगा में 97, गढ़वा में 40 और लातेहार में 30 स्कूलों को हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित किया गया है। विभाग की ओर से बताया गया है कि यू-डाइज डेटा के आधार पर चिन्हित इन क्षेत्रों में 6 से 18 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों को पुनः स्कूलों में नामांकित कराना और उनका ठहराव सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। अभियान के तहत शिक्षक घर-घर जाकर सर्वे कर रहे हैं। साथ ही ईंट-भट्ठों, निर्माण स्थलों, बाजार, ढाबों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशनों, झुग्गियों और कृषि क्षेत्रों जैसे स्थानों पर काम कर रहे बच्चों की पहचान की जा रही है। एकल-शिक्षक वाले स्कूलों में इस काम के लिए ब्लॉक रिसोर्स पर्सन (बीआरपी) और क्लस्टर रिसोर्स पर्सन (सीआरपी) की सहायता ली जा रही है। विभाग का लक्ष्य ‘जीरो ड्रॉपआउट’ वाले स्कूलों की संख्या बढ़ाना है। आम लोग भी विद्या समीक्षा केंद्र के टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 06512710007 पर संपर्क कर किसी भी ड्रॉपआउट या आउट-ऑफ-स्कूल बच्चे की जानकारी दे सकते हैं।

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विनीता चौबे को 10 साल का अनुभव है। उन्होनें सन्मार्ग से पत्रकारिता की शुरुआत की थी। फिर न्यूज विंग, बाइस स्कोप, द न्यूज पोस्ट में भी काम किया। वे राजनीति, अपराध, सामाजिक मुद्दों और स्थानीय घटनाओं से जुड़ी खबरों को सरल और तथ्यात्मक भाषा में पाठकों तक पहुंचाने के लिए जानी जाती हैं। पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय रहते हुए उनका प्रयास रहता है कि जमीनी स्तर की महत्वपूर्ण खबरों को सही और विश्वसनीय जानकारी के साथ लोगों तक पहुंचाया जाए।