
रांची: झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने राज्य के वकीलों, कानून के छात्रों, इंटर्न्स और विधि शिक्षकों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल को लेकर बेहद सख्त दिशा निर्देश जारी किए हैं। बार काउंसिल ऑफ इंडिया के निर्देशों के आलोक में जारी इस आदेश के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वकीलों द्वारा अपनी सेवाओं का प्रचार करने, रील्स या शॉर्ट्स बनाकर क्लाइंट्स लुभाने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। काउंसिल ने स्पष्ट किया है कि इंस्टाग्राम, यूट्यूब या फेसबुक जैसे माध्यमों पर प्रमोशनल कंटेंट डालना पेशेवर आचार संहिता (Professional Conduct) का सीधा उल्लंघन माना जाएगा। अधिवक्ता अपनी कानूनी विशेषज्ञता, उपलब्धियों या सेवाओं का विज्ञापन नहीं कर सकते हैं और न ही किसी इन्फ्लुएंसर की तरह रील्स या वीडियो बनाकर अपनी पहचान चमका सकते हैं।
बार काउंसिल ने यह भी हिदायत दी है कि सोशल मीडिया का उपयोग केवल जनहित में कानूनी जागरूकता फैलाने, सामान्य कानूनी जानकारी साझा करने और विधिक शिक्षा के उद्देश्यों के लिए ही किया जा सकता है। इसके अलावा बिना इजाजत अदालती कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग या लाइव स्ट्रीम की क्लिप्स काटकर प्रसारित करने, जजों, वकीलों या किसी पक्षकार का मजाक उड़ाने और मामलों को सनसनीखेज तरीके से पेश करने पर भी प्रतिबंध लगा दिया गया है। काउंसिल ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार फर्जी या भ्रामक वीडियो और कंटेंट को लेकर सख्त चेतावनी जारी की है, जिससे न्यायपालिका की गरिमा प्रभावित न हो और जनता के बीच भ्रम की स्थिति पैदा न हो। नियम तोड़ने वालों पर सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

