
रांची: झारखंड राज्य सूचना आयोग अब एक बार फिर पूरी तरह से सक्रिय हो गया है। लंबे इंतजार के बाद राज्य के चार नवनियुक्त सूचना आयुक्तों ने आज लोक भवन में पद और गोपनीयता की शपथ ली। राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने लोक भवन के दरबार हॉल में आयोजित एक समारोह में सभी नए आयुक्तों को शपथ दिलाई। इसी के साथ करीब पांच साल से निष्क्रिय पड़ा झारखंड राज्य सूचना आयोग अब पूरी तरह फंक्शनल हो गया है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, मंत्री, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार ने 10 जून को राज्यपाल की सशर्त स्वीकृति के बाद इन चार नामों की नियुक्ति की अधिसूचना जारी की थी। इनमें वरिष्ठ पत्रकार अनुज सिन्हा, झामुमो के पूर्व प्रवक्ता तनुज खत्री, भाजपा के पूर्व मीडिया प्रभारी शिवपूजन पाठक और कांग्रेस के पूर्व प्रदेश महासचिव अमूल नीरज खलखो शामिल हैं। इन नियुक्तियों के साथ आयोग में कामकाज दोबारा शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है, जिससे सूचना अधिकार से जुड़े मामलों के निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है।
इन नियुक्तियों की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि राज्यपाल संतोष गंगवार ने सूचना आयुक्तों की नियुक्ति संबंधी प्रस्ताव पर पहले दो बार अपनी आपत्ति दर्ज कराई थी। राजभवन की ओर से नियुक्ति प्रक्रिया के कुछ पहलुओं और कानूनी औपचारिकताओं पर सवाल उठाए गए थे, जिसके बाद राज्य सरकार को प्रस्ताव में आवश्यक स्पष्टीकरण और प्रक्रियागत सुधार करने पड़े। सभी संवैधानिक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद अंततः राज्यपाल ने नियुक्तियों को स्वीकृति दी और बुधवार को चारों सूचना आयुक्तों को शपथ दिलाई। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इन नियुक्तियों पर काफी समय से चर्चा चल रही थी। सूचना आयोग में लंबे समय से रिक्तियां होने के कारण सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत दायर द्वितीय अपीलों और शिकायतों का निष्पादन प्रभावित हो रहा था। बड़ी संख्या में मामले लंबित होने से आम नागरिकों को सूचना प्राप्त करने में विलंब का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में नए सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शपथ ग्रहण समारोह के दौरान राज्यपाल ने सभी नवनियुक्त सूचना आयुक्तों से संविधान और सूचना का अधिकार अधिनियम की भावना के अनुरूप निष्पक्षता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करने की अपेक्षा जताई। वहीं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने चारों सूचना आयुक्तों को शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके कार्यभार संभालने से आयोग की कार्यप्रणाली और अधिक प्रभावी होगी तथा लंबित मामलों का तेजी से निपटारा हो सकेगा। राज्य सूचना आयोग लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने वाली महत्वपूर्ण संवैधानिक संस्था है। यह सरकारी विभागों द्वारा सूचना उपलब्ध नहीं कराने या निर्धारित समय सीमा में जवाब नहीं देने से संबंधित मामलों की सुनवाई करता है। आयोग की सक्रियता से सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ती है और नागरिकों के सूचना के अधिकार को मजबूती मिलती है।

