
वाशिंगटन: अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और विदेश मंत्री मार्को रूबियो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंडे को लागू करने के मामले में अलग-अलग रुख अपनाते नजर आ रहे हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी में वैचारिक विभाजन के बीच 2028 के संभावित राष्ट्रपति पद के प्रतिद्वंद्वी माने जा रहे दोनों नेता अपनी-अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं। अलग-अलग पृष्ठभूमि और नीतिगत अनुभव रखने वाले दोनों नेताओं ने अपनी-अपनी राजनीतिक पहचान स्थापित करने के लिए अलग रास्ते अपनाए हैं। रुबियो, जो क्यूबा से आए प्रवासी माता-पिता के बेटे हैं, सीनेट में लंबा अनुभव रखते हैं और लैटिन अमेरिका में गहरी दिलचस्पी रखते हैं। वहीं, मरीन कोर में सेवा दे चुके वेंस ने सीनेट में सिर्फ दो साल अपनी सेवाएं दीं लेकिन फिर भी 2024 में उन्हें उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार के तौर पर चुना गया, जिन्होंने विदेशों में युद्धों के विरोध के संदेश को अपनी राजनीतिक पहचान का आधार बनाया।
हालांकि जेडी वेंस और मार्को रूबियो सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के प्रति सम्मानजनक रुख रखते हैं और ‘व्हाइट हाउस’ (अमेरिका के राष्ट्रपति का आधिकारिक आवास एवं कार्यालय) तथा विदेश मंत्रालय ने भी उनके बीच किसी तरह के मतभेद से इनकार किया है, फिर भी पश्चिम एशिया के मुद्दे पर दोनों के दृष्टिकोण काफी अधिक अलग दिखाई पड़ते हैं। ईरान के बारे में बात करते हुए वेंस ने कई बार इजराइल की आलोचना की और लेबनान में उसकी कार्रवाइयों की निंदा की। उनका कहना है कि ईरान समर्थित चरमपंथी समूह हिज्बुल्ला के खिलाफ इजराइल की कार्रवाइयों से ट्रंप नाराज रहे हैं; इन कार्रवाइयों ने ईरान को भड़काया है और तेहरान के साथ बातचीत को और मुश्किल बना दिया है।
वहीं दूसरी ओर, रुबियो इजराइल का समर्थन करते हैं या इस मामले पर खासकर लेबनान की स्थिति को लेकर चुप्पी साधे रखते हैं। लेबनान के मुद्दे पर रूबियो की पहल के कारण पिछले हफ्ते एक शुरुआती रूपरेखा समझौता तैयार हुआ। ईरान के साथ बातचीत की कमान वेंस ने और लेबनान के मामले की कमान रूबियो ने संभाली है। वाशिंगटन के थिंक टैंक ‘अटलांटिक काउंसिल’ से जुड़े और पोलैंड में राजदूत रह चुके पूर्व सहायक विदेश सचिव डैन फ्राइड ने कहा, ‘‘मतभेदों की बातें महज अटकलें नहीं हैं। इसमें निश्चित रूप से कुछ सच्चाई है।’’

