
Khunti News: तोरपा प्रखंड के दियांकेल स्थित एनओपीसी मैदान में 13 एवं 14 मई को प्रस्तावित ईसाई धार्मिक प्रार्थना सभा को लेकर विरोध शुरू हो गया है। इस संबंध में पारंपरिक आदिवासी संगठनों ने सोमवार को उपायुक्त खूंटी को ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है।
ज्ञापन में कहा गया है कि यह क्षेत्र अनुसूचित जनजातीय (आदिवासी) एवं पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत आता है, जहां ग्राम सभा की स्वायत्तता, पारंपरिक रीति-रिवाज और आदिवासी संस्कृति को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त है। आरोप लगाया गया है कि “प्रोफेट ब्रजिंदर सिंह मिनिस्ट्री” द्वारा आयोजित इस प्रार्थना सभा का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है तथा कार्यक्रम में शारीरिक बीमारियों, कर्ज, निराशा एवं बंधन से मुक्ति जैसे दावे किए जा रहे हैं।
ज्ञापनकर्ताओं ने आशंका जताई है कि इस प्रकार के आयोजनों से आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था, रूढ़ि-प्रथा और सांस्कृतिक पहचान पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि बाहरी धार्मिक गतिविधियों से धर्मांतरण जैसी गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
ज्ञापन में संविधान के अनुच्छेद 19(5)(6), अनुच्छेद 244(1), पांचवीं अनुसूची तथा पेसा कानून 1996 का हवाला देते हुए कहा गया है कि अनुसूचित क्षेत्रों में आदिवासी समाज की परंपराओं, सांस्कृतिक पहचान एवं ग्राम सभा के अधिकारों की रक्षा करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई है कि प्रस्तावित कार्यक्रम पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाई जाए, ताकि आदिवासी समाज की पारंपरिक धार्मिक-सामाजिक व्यवस्था एवं संवैधानिक अधिकार सुरक्षित रह सकें। ज्ञापन सौंपने वालों में पड़हा राजा सनिका मुंडा, कलिया मुंडा, सेलेम मुंडा, वीरेंद्र मुंडा, पूनम भेंगरा, संतोषी तोपनो, रोहित तानी, बिरसा कंडुलना, दीपक तिग्गा आदि शामिल थे।

