रांची : सरायकेला स्थित कोहिनूर पावर प्राइवेट लिमिटेड से जुड़े 290 करोड़ रुपये के बड़े बैंक लोन फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय यानी ED ने शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। शुक्रवार को जांच एजेंसी ने पश्चिम बंगाल के हावड़ा, हुगली, लेक टाउन और आसनसोल में कोहिनूर ग्रुप के चार्टर्ड अकाउंटेंट और उनके करीबियों के ठिकानों पर एक साथ कई छापे मारे। इस दौरान भारी मात्रा में वित्तीय दस्तावेज, हार्ड डिस्क और डिजिटल उपकरण बरामद किए गए हैं।

जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि कंपनी ने 66 मेगावाट का थर्मल पावर प्लांट लगाने के नाम पर बैंक ऑफ बड़ौदा के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से 290 करोड़ का कर्ज लिया था। लेकिन प्लांट लगाने की बजाय इस पूरी रकम को 100 से ज्यादा फर्जी यानी शेल कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। इस काले धन से प्रमोटर्स ने कोलकाता और आसपास के इलाकों में करोड़ों की संपत्तियां खरीदीं, जिनसे हर महीने 26 लाख रुपये तक का किराया वसूला जा रहा था। बैंकों को इस फर्जीवाड़े में 97.5% से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है।



